अतिग्रहणकारी ज़ायोनियों ने निरंतर पांचवें दिन नमाज़ियों के लिए मस्जिदुल अक़सा के दरवाज़े बंद रखे।
फ़िलिस्तीन अलयौम वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, ज़ायोनी बस्तियों के चरमपंथियों ने सोमवार की सुबह, विशेष पुलिस की कड़ी चौकसी में मस्जिदुल अक़सा पर हमला कर दिया। यह ऐसी स्थिति में है कि ज़ायोनी पुलिस ने यथावत मस्जिदुल अक़सा के द्वार पर लोहे की बाड़ लगी रखी है और उन्होंने मस्जिदुल अक़सा में युवा नमाज़ियों को जाने से रोक दिया और मस्जिदुल अक़सा से निकलने तक उनके कार्ड ज़ब्त रखे।
उधर ग़ज़्ज़ावासियों ने एक बार फिर मस्जिदुल अक़सा के समर्थन और बैलतुल मुक़द्दस पर ज़ायोनियों के अतिक्रमण के विरोध में प्रदर्शन किए। अलमनार टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को ग़ज़्ज़ावासियों ने, जिनमें हमास और फ़त्ह आंदोलन के समर्थक मौजूद थे, ज़ायोनी शासन की अतिक्रमणकारी नीतियों के विरुद्ध एक व्यापक प्रदर्शन का आयोजन किया। सूत्रों का कहना कि मस्जिदुल अक़सा के समर्थन में हमास और फ़त्ह आंदोलन के कार्यकर्ता एक ही मंच पर एकत्रित नज़र आये और उन्होंने मस्जिदुल अक़सा के समर्थन और बैतुल मुक़द्दस के विरुद्ध इस्राईल के अतिक्रमण के विरुद्ध एक साथ प्रदर्शन किए। हमास के प्रवक्ता सामी अबू ज़ोहरी ने कहा कि बैतुल मुक़द्दस का विषय, फ़िलिस्तीनी राष्ट्र और इस्लामी जगत का सबसे महत्त्वपूर्ण मुद्दा है और हम मस्जिदुल अक़सा के समर्थन में तनिक भी संकोच नहीं करेंगे।
दूसरी ओर ईरान में वरिष्ठ नेता का चयन करने वाली परिषद ने मस्जिदुल अक़सा अर्थात मुसलमानों के पहले क़िबले को ध्वस्त करने के ज़ायोनी शासन के षड्यंत्रों की निंदा की है। परिषद ने एक बयान जारी करके मुस्लिम धर्मगुरुओं, इस्लामी देशों के प्रमुखों और मुसलिम नेताओं से मांग की है कि वे मुसलमानों के मध्य एकता का प्रयास करें और मुसलमानों को लड़ाने के अवैध ज़ायोनी शासन तथा तकफ़ीरियों के षड्यंत्र को रोकें। बयान में विश्व समुदाय से मांग की है कि इस प्रकार के अपराधों को रोकने के लिए क़ानूनी उपाय करे।
10 नवंबर 2014 - 18:49
समाचार कोड: 650559
अतिग्रहणकारी ज़ायोनियों ने निरंतर पांचवें दिन नमाज़ियों के लिए मस्जिदुल अक़सा के दरवाज़े बंद रखे।