फ़िलिस्तीनियों की बंदी मामलों की संस्था की वकील हन्नान ख़तीब का कहना है कि इस्राईल की शारून नामक जेल में 17 महिला क़ैदी हैं जिनमें सबसे छोटी 16 वर्षीय दीमा मुहम्मद हमदान सवाहिरा हैं। सोलह वर्षीय दीमा मुहम्मद हमदान बैतुल मुक़द्दस की रहने वाली हैं उन्हें 13/1/2014 को गिरफ़्तार किया गया था। ग्यारहवीं कक्षा की इस छात्रा को 18 महीने की सज़ा सुनाई गयी है।
दीमा मुहम्मद हमदान की वकील हन्नान ख़तीब का कहना है कि जबसे उन्हें गिरफ़्तार किया गया है तब से उनकी कम आयु को लेकर अका क्षेत्र में काफ़ी हंगामे हुए जिसके बाद उन्हें छह महीने तक वहीं रखा गया और उसके बाद आपराधिक शाखा की अकेली कोठरी में 19 दिन तक बंद रखा गया जिसके दौरान उन्हें कठिन मानसिक यातनाओं से गुज़रना पड़ा। उनका कहना था कि दो महीने पहले उसके भाई का निधन हो गया था किन्तु उन्हें अपने घर वालों से संपर्क की अनुमति नहीं दी गयी।
एक अन्य महिला बंदी नहील तलाल रिज़वान अबू ईशा को जो अलख़लील क्षेत्र की रहने वाली हैं, 15/3/2013 को गिरफ़्तार किया गया। उन्हें इस्राईल की सुरक्षा के लिए भीषण ख़तरा होने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया। अबू ईशा का कहना है कि उन्हें इस्राईल की सुरक्षा के लिए भीषण ख़तरा होने का आरोप लगाकर गिरफ़्तार किया गया, इसलिए उनके पैरों में सदैव बेड़ी पड़ी रहती है। उनका कहना है कि जब वे अपने घरवालों या अपने वकील से मिलने जाती हैं तो उनके पैरों में बेड़ी बड़ी रहती है। उनका कहना है कि उन्हें विभिन्न प्रकार की मानसिक बीमारियों ने आ घेरा है और उन्हें उपचार की आवश्यकता है।
29 अक्टूबर 2014 - 19:34
समाचार कोड: 647813
फ़िलिस्तीनियों की बंदी मामलों की संस्था की वकील हन्नान ख़तीब का कहना है कि इस्राईल की शारून नामक जेल में 17 महिला क़ैदी हैं जिनमें सबसे छोटी 16 वर्षीय दीमा मुहम्मद हमदान सवाहिरा हैं।