26 अक्टूबर 2014 - 11:42
आतंकवाद किसी भी धर्म के अनुयायी पर दया नहीं करता

संसद सभापति डाक्टर अली लारीजानी का कहना है कि आतंकवाद की आग ने विश्व के समस्त लोगों और सभी धर्मों के अनुयाइयों के लिए ख़तरा उत्पन्न कर रखा और आतंकवाद किसी भी धर्म के अनुयायी पर दया नहीं करता।

संसद सभापति डाक्टर अली लारीजानी का कहना है कि आतंकवाद की आग ने विश्व के समस्त लोगों और सभी धर्मों के अनुयाइयों के लिए ख़तरा उत्पन्न कर रखा और आतंकवाद किसी भी धर्म के अनुयायी पर दया नहीं करता।
उन्होंने शनिवार को अरमीनियन ईसाई संप्रदाय के अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख जासलीक आराम प्रथम से भेंट में क्षेत्र की वर्तमान स्थिति तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार विमर्श किया और कहा कि विश्व की बड़ी शक्तियों की ओर से चरमपंथियों के भरपूर समर्थन के कारण यह संगठन क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरे में परिवर्तित हो गया है। श्री लारीजानी ने कहा कि आतंकवादी संगठनों ने विश्व के समस्त धर्मों और उनके अनुयाइयों के लिए गंभीर ख़तरे पैदा कर दिए हैं और आतंकी संगठन किसी भी धर्म के अनुयायी पर दया नहीं करता।
डाक्टर अली लारीजानी ने कहा कि आतंकवाद की लपटें, विश्व के समस्त धर्मों और उनके अनुयाइयों के लिए ख़तरा बनी हुई है। श्री लारीजानी ने कहा कि आतंकवाद के संबंध में विश्व की बड़ी शक्तियों के क्रियाक्लापों ने इस संगठन को अधिक मज़बूत कर दिया है। श्री लारीजानी ने आतंकवाद से संघर्ष के बारे में बने अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन के बारे में कहा कि इसकी कार्यवाहियों का कोई लाभ नहीं पहुंच रहा है क्योंकि इस गठबंधन में शामिल कुछ देशों का एक हाथ गठबंधन के साथ है और दूसरा आतंकियों के साथ। उनका कहना था कि यह सरकारें आतंकवाद से संघर्ष में तनिक भी गंभीर व सच्ची नहीं हैं।  
संसद सभापति डाक्टर अली लारीजानी ने कहा कि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, क्षेत्रीय शांति व सुरक्षा के साथ साथ पूरी दुनिया के लोगों की शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा है। इस भेंट वार्ता में जासलीक़ आराम प्रथम ने ईरान की ओर से अरमनी ईसाइयों के समर्थन पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अरमनी ईसाइयों को ईरान में व्यापक स्तर पर स्वतंत्रता है और ईरान की इस्लामी संस्कृति से अरमनी ईसाईयों के बहुत गहरे संबंध हैं।