23 अक्टूबर 2014 - 18:02
दाइश का सुन्नियों से कोई संबंध नहीं है।

इराक़ के कुर्दिस्तान के सुन्नी मौलाना ने कहा कि दाइश का सुन्नी मज़हब से कोई संबंध नहीं है।

अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार इराक़ के कुर्दिस्तान के सुन्नी मौलाना ने कहा कि दाइश का सुन्नी मज़हब से कोई संबंध नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार इराक़ के सुन्नी मौलाना शेख़ बहाउद्दीन नक़्शबंदी की लीडरशिप में आने वाले इस प्रतिनिधिमंडल ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हम ईदे ग़दीर ख़ुम और रसूल इस्लाम (स) के हाथों हज़रत इमाम अली (अ) को खलीफ़ा बनाए जाने की बधाई देते हैं तथा मराज-ए-केराम और बुज़ुर्ग हस्तियों द्वारा दी गई इस दावत पर उनका धन्यवाद देते हैं।
उन्होंने कहा कि हम इमाम हुसैन (अ) पर गर्व करते हैं क्योंकि मेरा संबंध अहलेबैत (अ) की नस्ल से है और हमारे पूर्वज हज़रत इमाम अली अ.ह हैं, आपका हरम भाईचारे और बरादरी, प्यार व मोहब्बत और शांतिपूर्वक ज़िंदगी बिताने की जगह है, क्योंकि पैग़म्बरे इस्लाम स.अ और अहलेबैत (अ) सभी के साथ प्यार व मुहब्बत से पेश आते थे और दूसरों को शांतिपूर्वक ज़िंदगी बिताने की ताकीद करते थे।
इस सुन्नी मौलाना ने दाइश के अपराधों की घोर निंदा करते हुए कहा कि आतंकवादी गुट के लिए “इस्लामी राज्य” का इस्तेमाल एक झूठ और धोखा है क्योंकि दाइश एक तकफ़ीरी वहाबी समूह है जिसका सुन्नी मज़हब से कोई संबंध नहीं है और इस्लाम भी नरसंहार और बर्बरता का विरोधी है।
नक़्शबंदी ने कहा कि आतंकवादी समूह दाइश को आले सऊद, तुर्की और क़तर का समर्थन हासिल है।
गौरतलब है कि तीसरे अंतर-राष्ट्रीय ग़दीर समारोह में भाग लेने वाले इराक़ के कुर्दिस्तान के सुन्नी उल्मा के प्रतिनिधिमंडल ने शहीदों के सैयद व सालार हज़रत इमाम हुसैन (अ) के हरम की ज़ियारत की।