20 अक्टूबर 2014 - 19:58
आईएसआईएल से लोहा लेने वाले भारतीय छात्र का भव्य स्वागत

इराक़ में तकफ़ीरी आतंकवादी गुट आईएसआईएल के ख़िलाफ़ लोहा लेने वाले भारतीय छात्र का भारत लौटने पर भव्य स्वागत किया गया है।

इराक़ में तकफ़ीरी आतंकवादी गुट आईएसआईएल के ख़िलाफ़ लोहा लेने वाले भारतीय छात्र का भारत लौटने पर भव्य स्वागत किया गया है।
इराक़ के पवित्र शहर नजफ़ में स्थित धार्मिक शिक्षा केन्द्र के भारतीय छात्र सैय्यद अब्बास नासिर सईद 28 का दावा है कि इराक़ में तकफ़ीरी आतंकवादी गुट के ख़िलाफ़ लड़ाई में भाग लेने वाले वह एकमात्र भारतीय नागरिक हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि आईएसआईएल के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए जब नागरिकों ने नामांकन शुरू किया तो उन्होंने भी स्वेच्छा से नामांकन किया और इराक़ी सेना द्वारा आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई का प्रशिक्षण लिया और एक महीने तक तकफ़ीरी आतंकवादियों से लोहा लिया।
लखनऊ में स्थित शिया कॉलेज में उनके स्वागत में आयोजित समारोह में बोलते हुए नासिर सईद ने बताया कि वे तीन महीनों की छुट्टियों के बाद वापस इराक़ लौट जायेंगे।
उल्लेखनीय है कि हज़ारों भारतीय युवा आईएसआईएल के आतंकवादियों के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए स्वेच्छा से अपना नामांकन कर चुके हैं लेकिन भारत सरकार ने उन्हें इसकी अनुमति प्रदान नहीं की।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, नासिर सईद का कहना था कि इराक़ी सेना और प्रभावशाली इराक़ी नेता मुक़तदा सद्र के लड़ाकों ने एक आतंकवाद विरोधी बल का गठन किया है, जिसकी ज़िम्मेदारी पवित्र स्थलों और रौज़ों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाना है।
उनका कहना था कि हमें बग़दाद से लगभग 125 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सामर्रा शहर में पवित्र रौज़े की सुरक्षा पर तैनात किया गया था।
नासिर सईद ने कहा कि उनके ज़हन में यह बात आई थी कि विदेश में सैन्य गतिविधियों में शामिल होने से कुछ क़ानूनी समस्याएं पेश आ सकती हैं। लेकिन जब आप के घर धावा बोल दिया जाता है तो आप सरकार के पास अनुमति के लिए नहीं दौड़ते हैं। पहले आप अपने घर की और ख़ुद की रक्षा करते हैं। और उसी दौरान आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए वरिष्ठ धार्मिक गुरूओं का भी फ़तवा आ गया।
उन्होंने आईएसआईएल को ख़ुद को मुसलमान बताने की निंदा करते हुए कहा कि वे निर्दोष और आम मुसलमानों की बड़ी ही क्रूरता से हत्याएं कर रहे हैं, बच्चों के सिर क़लम किए जा रहे हैं, महिलाओं को पकड़ कर बाज़ारों में बेचा जा रहा है। यह पत्थर दिल लोग हैं जो किसी पर भी रहम नहीं कर रहे हैं।