3 अक्टूबर 2014 - 18:33
इस्लामी दुनिया से जुड़े मामलों पर ध्यान देना हाजियों का कर्तव्य है

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने मुसलमानों के मध्य एकता पर बल दिया है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने इस्लामी जगत से जुड़े मामलों व समस्याओं पर ध्यान देने को हाजियों का सर्वोपरि दायित्व बताया है।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने मुसलमानों के मध्य एकता पर बल दिया है।  इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने इस्लामी जगत से जुड़े मामलों व समस्याओं पर ध्यान देने को हाजियों का सर्वोपरि दायित्व बताया है।
वरिष्ठ नेता ने हज के उपलक्ष्य में शुक्रवार को अपने संदेश में बल देकर कहा कि मुसलमानों के मध्य एकता के लिए प्रयास करना और इस्लामी राष्ट्रों की समस्याओं के समाधान के लिए कोशिश करना इस्लामी राष्ट्र का महत्वपूर्ण दायित्व है और हज/ एकता,एकजुटता, बंधुत्व और एक दूसरे से सहकारिता का प्रतीक है।
ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि हज में सबको समान बिन्दुओं और मतभेदों के समाधान पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिये क्योंकि साम्रज्यवादी शक्तियों की नीतियां प्राचीन समय से अपने लक्ष्यों को साधने के लिए फूट डालना रही हैं और इसे वे अपनी कार्यसूचि में सर्वोपरि रखती थीं और आज इस्लामी जागरुकता की विभूति से मुसलमान राष्ट्र साम्राज्य और जायोनिज्म शत्रु को अच्छी तरह पहचान गये और उसके मुकाबले में दृष्टिकोण अपनाया।
वरिष्ठ नेता ने फिलिस्तीन समस्या और जायोनी शासन के अपराधों की ओर संकेत करते हुए भी स्पष्ट किया कि यह वास्तविकता सब पर स्पष्ट हो गयी कि यह शासन और इसके समर्थक मानवीय व नैतिक मूल्यों के उल्लंघन में किसी प्रकार की सीमा को नहीं पहचानते थे। वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा कि जायोनी शासन की पाश्विकता और रक्त पिपासु प्रवृत्ति इस शासन तथा इसके समर्थकों के लक्ष्यों को पूरा नहीं कर सकी और जायोनी शासन को बचाने के लिए किये जाने वाले प्रयासों के विपरीत यह शासन दिन प्रतिदिन अपने अंत से निकट होता जा रहा है।
ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने इसी प्रकार विशुद्ध इस्लाम को अध्यात्म, सदाचारिता और लोकतंत्र बताया और बल देकर कहा कि अमेरिकी इस्लाम अपने पिट्ठुओं को इस्लामी वस्त्र धारण कराना और मुसलमानों के मध्य शत्रुता एवं दुश्मनी का बीज बोना है।
वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि जो इस्लाम मुसलमानों के मध्य फूट डालने को हवा दे, ईश्वरीय वचनों व वादों पर भरोसा करने के बजाये दुश्मनों पर विश्वास करे, जायोनिज्म और विश्व साम्राज्य से मुकाबला करने से बजाय अपने मुसलमान भाइयों से संघर्ष करे और अमेरिका अहंकारी स्वयं अपनी जनता या दूसरे राष्ट्रों के विरुद्ध कार्यवाही करे तो वह इस्लाम नहीं है बल्कि वह खतरनाक मित्थ्याचार है जिससे सच्चे मुसलमान को उससे मुकाबला करना चाहिये ।