लखनऊ 31 अगस्तः दिल्ली के इस्लामिक कल्चर सेंटर में हुई “एकता में परहेज़ क्यूं” कान्फ़्रेंस की निंदा करते हुए एदारा-ए-मक़सदे हुसैनी के जनरल सिक्रेटरी मौलाना सय्यद रज़ा हुसैन ने कहा कि यह कान्फ़्रेंस एकता में परहेज़ क्यूं के नाम में हुई मगर इस कान्फ़्रेंस में केवल फ़साद और एकता विरूद्ध बातें की गईं। आज़म ख़ान ने जिस तरह शिया धर्मगुरूओं की निंदा की, उन पर कीचड़ उछाला और ख़ास तौर पर मौलाना कल्बे जवाद की ज़ात को निशाना बनाया इसमें साफ़ होता है कि यह कान्फ़्रेंस उन्होंने मौलाना कल्बे जवाद के खिलाफ़ ही की गई थी और इसका एकता में कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने कहा कि आज़म ख़ान ने सरकारी मशीनरी का ग़लत इस्तेमाल किया और दीनी मदारिस के टीचर्स को डरा धमका कर कान्फ़्रेंस में बुलाया ताकि वो मीडिया और अवाम को धर्मगुरूओं की संख्या और शियों की भीड़ दिखा सकें।
नूरे हिदायत फ़ाउंडेशन के मौलाना असीफ़ जायसी ने कान्फ़्रेंस में मौलाना कल्बे जवाद पर लगाये गये आरोप की निंदा करते हुये कहा कि आज़म ख़ान अब अपनी ईमानदारी का ढ़िंढ़ोरा न्यूज़पेपर में इश्तिहार देकर पीट रहे हैं। वो इस समय बुरी तरह बौखलाए हुये हैं और दिमाग़ी संतुलन खो बैठे हैं। कोई भी ईमानदार शख़्स अपने काम की वजह में पहचाना जाता है न कि ईमानदारी का ढ़िंढ़ोरा पीटने से। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुई इस कान्फ़्रेंस का केवल एक ही मक़सद था कि किसी तरह शिया सुन्नी इख़्तेलाफ़ को हवा दी जाये। आख़िर क्या वजह है कि इस कान्फ़्रेंस में केवल वही मौलवी पहुंचे जो सरकारी मदरसों से तअल्लुक़ रखते थे या उन्हें ग्रांटेड होने की उम्मीद है आज़म ख़ान दिल्ली के विख्यात धर्मगुरूओं को अपनी कान्फ़्रेंस में क्यूं शरीक नहीं कर सके? यह एक सवालिया निशान हैं मौलाना अमीर हैदर ने कहा कि आज़म ख़ान जिस तरह मौलाना कल्बे जवाद के खिलाफ़ उल्टा सीधा बोल रहे हैं और ख़ुद को मुसलमानों का बड़ा लीडर साबित करने के लिये जिस तरह उन्होंने लखनऊ में मौलवियों की टीम को बयानबाज़ी के लिये खड़ा किया है इसमें साफ़ हो जाता है कि वो किस क़दर परेशान और दिमाग़ी बीमारी में फंसे हैं।
(एजेंसी का उपरोक्त बातों से सहमत होना ज़रूरी नहीं है।)