अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबनाः आयतुल्लाहिल उज़मा सुबहानी ने एक बयान जारी कर सऊदी अरब के वरिष्ठ मौलाना आयतुल्लाह शेख नम्र बाक़िर-अल-नम्र को मौत की सज़ा दिए जाने के आदेश की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि जेल में इस वरिष्ठ आलिम से बदसलूकी की आने वाली रिपोर्टें बेहद अफ़सोसनाक हैं।
उन्होंने अपने बयान में कहा: क़ुरआन और हदीस सभी मुसलमानों ख़ास कर क़ुरआन और सुन्नत से परिचित लोगों को हुक्म देता है कि अधिकारियों और राजाओं को नसीहत की जाए।
आयतुल्लाह सुबहानी ने अपने बयान में इस बात की ओर इशारा करते हुए कि इस बात पर कि “النصیحۃ لائمۃ المسلمین” (नसीहत मुसलमानों के शासकों के लिए) सभी हदीस के विशेषज्ञ और उल्मा सहमत हैं, कहा कि आयतुल्लाह शेख नम्र ने अम्र बिल मारूफ़ व नही अनिल मुनकर और नसीहत के अलावा कुछ भी नहीं किया है उन्होंने हमेशा ही शियों के बर्बाद हुए अधिकारों का बचाव किया है और अधिकारियों को लोगों के साथ भेदभाव से परहेज करने को कहा है और इस काम पर उन्हें इनाम मिलना चाहिये न मौत की सज़ा।
उन्होंने अपने इस बयान में कहा कि सऊदी अधिकारियों यह मत सोचें कि आयतुल्लाह नम्र को मौत देकर अपनी हुकूमत के स्तंभ मजबूत कर लेंगे बल्कि उनके ख़ून की एक बूंद से सऊदी सरकार में ऐसा भूकंप आएगा जिससे सऊदी सरकार की चूलें हिल जाएंगी।
उन्होंने कहा कि हम इस मुद्दे को सुलझाने के लिए इस प्रस्ताव देते हैं कि सरकार मज़हबी उलमा की एक समिति बनाये जिसका राजनीति से कोई संबंध न हो जो किताब और सुन्नत की रौशनी में इस समस्या की जाँच करे।
आयतुल्लाह सुबहानी ने कहा: हम हेजाज़ ख़ास कर हरमैन शरीफ़ैन के उलमा से मांग करते हैं कि इस नाइंसाफ़ी व ज़ालिमाना आदेश के खिलाफ़ अपनी आवाज बुलंद करें और अपने शासकों को ऐसे घिनौने काम के करने से रोकें।
12 अगस्त 2014 - 15:00
समाचार कोड: 630667
आयतुल्लाहिल उज़मा सुबहानी ने एक बयान जारी कर सऊदी अरब के वरिष्ठ मौलाना आयतुल्लाह शेख नम्र बाक़िर-अल-नम्र को मौत की सज़ा दिए जाने के आदेश की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि जेल में इस वरिष्ठ आलिम से बदसलूकी की आने वाली रिपोर्टें बेहद अफ़सोसनाक हैं।