6 अगस्त 2014 - 04:02
हिलेरी क्लिंटन बोलीः दाइश को मध्यपूर्व को बांटने के लिए बनाया।

पूर्व अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अपनी नई किताब में बल दिया कि दाइश का अमरीका और मिस्र में इख़्वानुल मुस्लेमीन के बीच सहमति के अनुसार गठन होना था।

अबनाः पूर्व अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अपनी नई किताब में बल दिया कि दाइश का अमरीका और मिस्र में इख़्वानुल मुस्लेमीन के बीच सहमति के अनुसार गठन होना था।
सीरिया के अलअख़्बारिया चैनल ने हिलैरी क्लिंटन के हवाले से उनकी यादों पर आधारित किताब से संबंधित रिपोर्ट दी है, “हमने इराक़ सीरिया और लीबिया जंग में हिस्सा लिया और सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन अचानक मिस्र में तीस जून को इख़्वानुल मुस्लेमीन के विरुद्ध इंक़ेलाब आया और 72 घंटे में सब कुछ बदल गया। हमने मिस्र में इख़्वानुल मुस्लेमीन के साथ यह साठगांठ की थी कि सीना प्रायद्वीप में दाइश की हुकूमत हो। यह भी तय पाया था कि सीना प्रायद्वीप का एक हिस्सा हमास को और एक हिस्सा इस्राईल को दे दिया जाए और हलाएब और शलातीन हिस्सा सूडान को दे दिए जाएं और मिस्र की सरकार अस्सलूम इलाक़े में लीबिया से मिली सीमा खोले।
हिलेरी क्लिंटन ने कहा, “ यह तय पाया था कि पांच जून 2013 को अपने योरोपीय घटकों के साथ बैठक में दाइश को औपचारिक रूप से मान्यता दी जाएगी। मैंने 112 देशों का दौरा किया ताकि अमरीका की भूमिका और दाइश की सरकार के गठन के बाद उसे तुरंत मान्यता देने के बारे में कुछ दोस्त देशों के साथ हुई सहमति के बारे में उन्हें बताएं लेकिन अचानक सब कुछ आंखों के सामने ढ़ह गया।”
अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इस किताब में मध्यपूर्व के संबंध में वाशिंग्टन की योजनाओं के बारे में लिखा, “ हम मिस्र में इख़्वानुल मुस्लेमीन और दाइश के ज़रिए इलाक़े को बांट देते और फिर इख़्वानुल मुस्लेमीन में अपने तत्वों को फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती देशों के पीछे लगाते। यह काम कुवैत से शुरु होता और फिर क्रमानुसार संयुक्त अरब इमारात, बहरैन और ओमान तक पहुंचता। उसके बाद अरब और पश्चिमी अरब इलाक़े का नक़्शा पूरी तरह बदल जाता और हम तेल के स्रोतों पर पूरी तरह क़ब्ज़ा कर लेते और समुद्री रास्ता भी हासिल कर लेते।”