24 जुलाई 2014 - 17:10
आयतुल्लाह सीसतानी का नेतृत्व न होता तो इराक़ संकट और गहरा जाता।

डाक्टर हसन रूहानी ने मुस्लिम राष्ट्रों के बीच फूट व दूरी पर टिप्पणी करते हुए एकता, भाईचारे और समरसता को इलाक़ाई संकट ख़ासकर इस्लामी देशों की समस्याओं के समाधान का रास्ता बताया।

डाक्टर हसन रूहानी ने मुस्लिम राष्ट्रों के बीच फूट व दूरी पर टिप्पणी करते हुए एकता, भाईचारे और समरसता को इलाक़ाई संकट ख़ासकर इस्लामी देशों की समस्याओं के समाधान का रास्ता बताया। उन्होंने इराक़ सहित क्षेत्रीय देशों के संकटों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर इराक़ में राष्ट्रीय एकता व एकजुटता होती तो कभी भी एक छोटा सा गुट इस देश के कुछ भागों पर कंट्रोल करके इराक़ी राष्ट्र व सरकार को समस्या में नहीं डाल सकता था।
राष्ट्रपति ने इराक़ में मरजईयत की भूमिका को एक बड़ा पाठ बताया और कहा कि अगर इस देश में आयतुल्लाह सीस्तानी का नेतृत्व न होता तो संभव था कि इराक़ में उत्पन्न होने वाली यह समस्या कहीं अधिक गहरा जाती।
डाक्टर रूहानी ने इसी प्रकार ज़ायोनी सैनिकों के हाथों ग़ज़्ज़ा में निर्दोष बच्चों व महिलाओं के जनसंहार की ओर इशारा करते हुए, ग़ज़्ज़ा के संकट को रोकने में संयुक्त राष्ट्र संघ, सुरक्षा परिषद और अन्य संगठनों की विफलता की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान कई दिन से ग़ज़्ज़ा की मज़लूम जनता तक मेडिकल हेल्प पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।