अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबनाः भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने देश की शरई अदालतों और उनके फ़तवो को अवैध बताया है। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि देश में स्थापित शरई अदालतें जनता के अधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं इसलिए उन पर प्रतिबंध लगाया जाए।
जिस पर अदालत ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अपने फैसले में कहा है कि इस्लाम सहित कोई भी धर्म ऐसे प्रावधानों से निर्दोष लोगों को सजा देने की अनुमति नहीं देता जिन्हें कानूनी तौर मान्यता प्राप्त न हो। निःसंदेह फ़तवे को इस्लाम में महत्व हासिल है लेकिन इसे किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में स्थापित शरई अदालतों और दारुलकज़ा को संवैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं है और वह ऐसे किसी फैसले और फ़तवे नहीं दे सकते जिससे किसी व्यक्ति के अधिकारों का हनन होता हो। इस तरह के फैसले और फ़तवे प्रतिबंधित और गैर कानूनी होगें। गौरतलब है कि हिंदुस्तान में मुसलमानों की ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों में शरई अदालतें स्थापित हैं जो विभिन्न मामलों में फ़तवे जारी करते हैं।
8 जुलाई 2014 - 17:23
समाचार कोड: 622498
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने देश की शरई अदालतों और उनके फ़तवो को अवैध बताया है। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि देश में स्थापित शरई अदालतें जनता के अधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं इसलिए उन पर प्रतिबंध लगाया जाए।