24 जून 2014 - 18:47
इस्राईल के अपराधों पर संयुक्त राष्ट्र संघ की चुप्पी।

अतिग्रहित फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में इस्राईल के अपराधों की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बार फिर आंख मूंद ली है सोमवार को पंद्रह सदस्यीय सुरक्षा परिषद में इस्राईल के हालिया हमलों में शहीद होने वाले फ़िलिस्तीनियों की मृत्यु पर खेद प्रकट करने के लिए एक बयान जारी करने पर सहमति नहीं बन पायी।

अतिग्रहित फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में इस्राईल के अपराधों की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बार फिर आंख मूंद ली है सोमवार को पंद्रह सदस्यीय सुरक्षा परिषद में इस्राईल के हालिया हमलों में शहीद होने वाले फ़िलिस्तीनियों की मृत्यु पर खेद प्रकट करने के लिए एक बयान जारी करने पर सहमति नहीं बन पायी।
बंद दरवाज़ों के पीछे हुयी इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र संघ में रूसी प्रतिनिधि विताली चुरकीन ने फ़िलिस्तीनियों की अपील पर एक प्रेस बयान जारी करने का प्रस्ताव रखा था किन्तु अमरीकी दूत ने इस्राईल के नाम के उल्लेख का विरोध किया। कूटनयिक सूत्रों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीकी दूत समांथा पावर ने कहा कि इस्राईल को सीधे तौर पर निशाना बनाने वाली किसी भी प्रकार भाषा अमरीका के लिए रेड लाइन है।
हालांकि सुरक्षा परिषद के एक अन्य सदस्य जॉर्डन ने खेद प्रकट करने के स्थान पर सख़्त भाषा की वकालत की थी। उसका कहना था कि खेद शब्द काफ़ी नहीं है।
ज्ञात रहे फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन के हमले की ताज़ा लहर बारह जून को पश्चिमी तट से तीन इस्राइली अधिवासियों के लापता होने के बाद शुरु हुयी।
इस्राईल अधिवासियों के कथित तौर पर लापता होने के पीछे हमास पर आरोप लगाता है जबकि हमास ने इस प्रकार की किसी भी संलिप्तता का इंकार करते हुए कहा है कि तेल अविव के इस आरोप का लक्ष्य हमास और फ़त्ह के बीच हालिया राष्ट्रीय सहमति को ख़त्म करना है।
अप्रैल में हमास और फ़त्ह ने वर्षों की प्रतिद्वंद्विता को ख़त्म करते हुए एकता सरकार के गठन के एक समझौते पर दस्तख़त किए। इस क़दम से वाशिंग्टन और तेल अविव क्रोधित हैं।