इराक़ में तकफ़ीरी आतंकवादी संगठन दाइश का ख़ूनी खेल अपने चरम पर है। इन आतंकवादियों नें नैनवा और मूसेल पर क़ब्ज़ा कर के लाखों लोगों को बेघर कर दिया है और बग़दाद व करबला उनका अगला निशाना है। इस वजह से देश के सभी पवित्र स्थलों के लिये ख़तरा पैदा हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र नें अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय से ज़ोर देकर कहा है कि वह इराक़ी सरकार को इन तकफ़ीरी आतंकवादियों का मुक़ाबला करने के लिये सहयोग करे और इस्लामी रिपब्लिक ईरान नें इराक़ की सरकार को इस स्थिति से निपटने के लिये सभी तरह से मदद करने का ऐलान किया है।
रिपोर्ट के अनुसार इराक़ के एक उच्च सुरक्षा अधिकारी नें कहा है कि बअसियों और अमरीका की मदद से तकफ़ीरी आतंकवादी दाइश इराक़ के पश्चिमी इलाक़ों में अशांति फैला रहा है।
इराक़ के इस उच्च सुरक्षा अधिकारी नें अपना नाम न बताने की शर्त पर फ़ार्स न्यूज़ से बातचीत में तकफ़ीरी आतंकवादियों की कार्यवाहियों, उसकी आय और उसके हथियारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस इराक़ी पदाधिकारी नें कहा है कि दाइश के दस्ते में पूर्व बअसी लोग और सद्दाम की स्पेशल फ़ोर्स के लोग शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन लोगों नें इराक़ में शिया मुसलमानों की सरकार के सत्ता में आने के बाद शुरी ही से इराक़ में अस्थिरता फैला कर इस हुकूमत के कमज़ोर करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि तकफ़ीरी संगठन दाइश में लीबिया, त्यूनिस, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के किराए के एजेण्ट शामिल हैं और पिछले तीन सालों में उन्हें जॉर्डन, तुर्की और पाकिस्तान में सी आई ए और मूसाद के लोगों नें ट्रेनिंग दी है जिसके बाद उन्हें लड़ाई में बहुत अनुभव हो गया है।
इस इराक़ी अधिकारी नें कहा कि पिछले तीन सालों में तकफ़ीरी संगठन दाइश को अपने पश्चिमी समर्थकों, मुख्य रूप से अमरीका से हथियार मिल रहे हैं और अब इराक़ में यह हथियार इस्तेमाल किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दाइश के आतंकी ट्रेनिंग पाए हुए हैं और उत्तरी इराक़ में फ़ौजी अड्डों को अच्छी तरह से जानते हैं और उनमें ज़्यादातर के पास एस्नाइपर गनें भी है।
उन्होंने कहा कि इराक़ी फ़ौज में शामिल बअसी तत्वों और अमरीकियों के विश्वासघात से यह स्थिति आ पहुँची है और अमरीका पिछले दस सालों से इराक़ी सरकार पर लगातार दबाव डालता रहा है कि बअसियों को फ़ौज में शामिल किया जाए और उन्हें महत्वपूर्ण कमाण्डर पद भी सौंपा जाए जिसके परिणाम स्वरूप बअसी तत्व फ़ौज में घुस चुके हैं और जहाँ जहाँ वह मौजूद हैं वहाँ विश्वासघात करते हैं।
इराक़ के इस उच्च सुरक्षा अधिकारी नें कहा कि जहाँ बअसी कमाण्डर हैं वहाँ उन्होंने ऐसी साज़िशें की हैं कि जिस फ़ौजी अड्डे में बड़े बड़े हथियार हैं वहाँ गोला बारूद नहीं है और जहाँ गोला बारूद है वहाँ हथियार नहीं हैं जिसकी वजह से फ़ौज को आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने में बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि अमरीका नें पिछले दस सालों में इस बात की इजाज़त नहीं दी है कि इराक़ की फ़ौज ताक़तवर हो न ही उसे माडर्न हथियार और फ़ौजी सामान उपलब्ध कराया, उन्होंने कहा कि इराक़ी वायु सेना का भी बुरा हाल है और बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि फ़ौज में अब तक मज़बूत इंटेलिजेंस सिस्टम नहीं बन सका है जबकि अमरीका बअसी तत्वों को फ़ौज में रखने पर दबाव डाल रहा है।
13 जून 2014 - 08:42
समाचार कोड: 615623
इराक़ में तकफ़ीरी आतंकवादी संगठन दाइश का ख़ूनी खेल अपने चरम पर है। इन आतंकवादियों नें नैनवा और मूसेल पर क़ब्ज़ा कर के लाखों लोगों को बेघर कर दिया है और बग़दाद व करबला उनका अगला निशाना है। इस वजह से देश के सभी पवित्र स्थलों के लिये ख़तरा पैदा हो गया है।