राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा है कि जीत-जीत की नीति अपना कर और विस्तारवाद एवं धमकियों की नीति से दूर रहकर अंतिम परमाणु समझौते तक पहुंचा जा सकता है।
उन्होंने एशिया में सहभागिता और विश्वास बहाली के उपायों की कान्फ़्रेंस सीका के चौथे शिखर सम्मेलन में भाषण देते हुए कहा कि इस्लामी रिपब्लिक ईरान अपने धार्मिक व नैतिक सिद्धांतों और डिफ़ेंस स्ट्रॉटेजी के आधार पर परमाणु हथियारों का विरोधी है लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक की प्राप्ति को अपना और दुनिया के समस्त देशों का अधिकार समझता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के 68वें सम्मेलन में ईरान द्वारा पेश किये गये चरमपंथ और हिंसा के विरुद्ध प्रस्ताव की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस प्रस्ताव में हथियारों के बजाए बातचीत, ज़ोर-ज़बरदस्ती के बजाए दिमाग़ से काम लेने और तबाही व बर्बादी के बजाए शांति व स्थिरता की बात कही गयी है और सीका के कुछ सदस्य देश इस प्रस्ताव के संकलन में भागीदार भी रहे हैं, यह इस बात को दर्शाता है कि दुनिया के सबसे महान धर्मों और बौद्धिक विचारधाराओं के पालने के रूप में एशिया, यथावत चरमपंथ और हिंसा विरोधी ज़मीन रही है।
डाक्टर हसन रूहानी ने इंसान की शांति और सुरक्षा के लिए सामूहिक जनसंहारक हथियारों के विध्वंसक ख़तरों को समाप्त करने के लिए सीका के सदस्य देशों के संयुक्त कोशिशों और सहयोग पर बल देते हुए कहा कि इन हथियारों के संपूर्ण ख़तरों की समाप्ति का एकमात्र रास्ता, इनका पूरी तरह सफाया है।
21 मई 2014 - 14:14
समाचार कोड: 610300
राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा है कि जीत-जीत की नीति अपना कर और विस्तारवाद एवं धमकियों की नीति से दूर रहकर अंतिम परमाणु समझौते तक पहुंचा जा सकता है।