15 मई 2014 - 14:41
फ़िलिस्तीन में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन।

फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों पर ज़ायोनियों के आपराधिक क़ब्ज़े की शुरुआत के दिन 15 मई को फ़िलिस्तीनी जनता नकबह अथवा दुर्भाग्य दिवस के रूप मे मनाती है। इसी उपलक्ष्य में फ़िलिस्तीन के भीतर तथा बाहर व्यापक रूप से रैलियां निकाली गईं और फ़िलिस्तीन पर इस्राईल के क़ब्ज़े की आलोचना की गई।

फ़िलिस्तीन की जनता 66वां नकबह दिवस मना रही है।
इस दिन इस्लामी जगत फ़िलिस्तीन के अनेक गावों और शहरों में होने वाले जनसंहार को याद करती है जिसमें सैकड़ों की संख्या में फ़िलिस्तीनी नागरिक, ज़ायोनियों के हाथों मारे गए थे जबकि लाखों फ़िलिस्तीनी विस्थापित हुए थे। इन वर्षों के दौरान फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों की संख्या साठ लाख तक पहुंच चुकी है जो अनेक देशों में रह रहे हैं। ज़ायोनियों ने फ़िलिस्तीनियों के 800 से अधिक शहरों और गांवों को ध्वस्त करके वहां पर यहूदी बस्तियों का निर्माण कर दिया है।
फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों पर ज़ायोनियों के आपराधिक क़ब्ज़े की शुरुआत के दिन 15 मई को फ़िलिस्तीनी जनता नकबह अथवा दुर्भाग्य दिवस के रूप मे मनाती है। इसी उपलक्ष्य में फ़िलिस्तीन के भीतर तथा बाहर व्यापक रूप से रैलियां निकाली गईं और फ़िलिस्तीन पर इस्राईल के क़ब्ज़े की आलोचना की गई।
इस अवसर पर फ़िलिस्तीनी संगठन हमास के एक नेता अबु उबैदह ने कहा कि फ़िलिस्तीन की धरती पर अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन का कोई भविष्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस्राईल अरब धरती पर एक काल्पनिक रेखा से अधिक कुछ नहीं है।
नकबह दिवस पर फ़िलिस्तीनी नेता मरवान बरग़ूसी ने जो इस्राईल की जेल में बंद हैं अपने एक पत्र में लिखा है कि फ़िलिस्तीन की धरती से बाहर निकाल दिए गए फ़िलिस्तीनियों का स्वदेश वापसी का अधिकार एक पवित्र अधिकार है जिस पर कोई सौदे बाज़ी नहीं हो सकती।

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