इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने कहा है कि दुश्मनों की यह अपेक्षा बेवक़ूफ़ी है कि ईरान अपने मिज़ाइल प्रोग्राम को रोक देगा।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने रविवार को इस्लामी इंक़ेलाब संरक्षक बल सिपाहे पासदारान की एरोस्पेस यूनिट की उपलब्धियों की प्रदर्शनी का निरीक्षण करने के बाद इस बल के वरिष्ठ कमांडरों से मुलाक़ात में कहा कि पश्चिम वाले, वार्ता के दौरान ऐसी स्थिति में ईरान के मीज़ाइल प्रोग्राम को सीमित किए जाने की अपेक्षा कर रहे हैं जब वे निरंतर ईरान को फ़ौजी धमकियां देते रहते हैं अतः इस प्रकार की आशा, मूर्खता और बेवक़ूफ़ी है।
उन्होंने योग्यता, क्षमता और संकल्प को, शक्ति व प्रभुत्व का सबसे महत्वपूर्ण कारक बताया और अधिकारियों से कहा कि वे विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन में हर संभव प्रयासों और नवीन विचारों से काम लें किंतु ईरान की आवश्यकताओं और प्रतिबंध जैसी कुछ बातों को वार्ता पर निर्भर नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें इस विषय को दूसरे मार्गों से हल करना चाहिए।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा इमाम ख़ामेनेई ने ईरानी राष्ट्र से दुश्मनता का मुख्य कारण, स्वाधीनता और इस्लाम व क़ुरआन पर कटिबद्धता को बताया और कहा कि इस्लाम और क़ुरआन, मुस्लिम राष्ट्रों को अपने पैरों पर खड़े होने, अपनी इस्लामी व मानवीय पहचान पर भरोसा करने, ईश्वर से भरपूर आशा रखने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले अत्याचारों के समक्ष सिर न झुकाने का निमंत्रण देते हैं अतः जब तक ईरानी राष्ट्र, इस्लाम, क़ुरआने और अपने उच्च लक्ष्यों पर डटा रहेगा तब तक उसके साथ साम्राज्य की दुश्मनता भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि साम्राज्यवादी मोर्चा ईरानी राष्ट्र को घुटने टेकने और पीछे हटने पर विवश करना चाहता है किंतु निश्चित रूप से वह इसमें सफल नहीं होगा।