1 फ़रवरी 2014 - 20:30
बहरैनः राष्ट्रीय उल्मा काउंसिल पर पाबंदी, जनता में आक्रोश।

बहरैन की तानाशाह हुकूमत की तरफ़ से राष्ट्रीय उल्मा काउंसिल पर पाबंदी लगाए जाने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग राष्ट्रीय उल्मा काउंसिल के आफ़िस पहुँचना शुरू हो गए हैं

बहरैन की तानाशाह हुकूमत की तरफ़ से राष्ट्रीय उल्मा काउंसिल पर पाबंदी लगाए जाने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग राष्ट्रीय उल्मा काउंसिल के आफ़िस पहुँचना शुरू हो गए हैं। अल आलम की रिपोर्ट के अनुसार उल्मा काउंसिल के राष्ट्रीय लीडर शेख़ मोहम्मद ख़ुजिस्ता नें कहा है कि यह काउंसिल एक ऐसा इस्लामी संगठन है जिसका लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है। यह संगठन कभी ढका छिपा काम नहीं करता। उन्होंने कहा कि इस संगठन का उद्देश्य इस्लामी पहचान को बनाए रखना और समाज में इस्लामी एकता के संदेश को उजागर करना, इस्लामी शिक्षाओं से लोगों को रुबरु कराना और लोगों को अल्लाह की तरफ़ बुलाना है। उल्मा काउंसिल की सम्पर्क समिति नें भी आले ख़लीफ़ा की इस कार्यवाही की कड़े शब्दों में निंदा की है। उल्लेखनीय है बहरैन की अदालत नें देश की सबसे बड़ी उल्मा काउंसिल पर पाबंदी लगा दी है और साथ ही काउंसिल के बैंक अकाउंट सीज़ करने का आदेश दिया है।