कर्बला की घटना और हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के कथनों पर नज़र डालने से, आशूरा के जो संदेश हमारे सामने आते हैं उनमें से एकःबनी उमय्या, यह कोशिश कर रहे थे कि पैगम्बरे इस्लाम (स.अ) की सुन्नत को मिटा दें और जाहेलियत के ज़माने के सिस्टम को दोबारा लागू कर दिया जाए। यह बात हज़रत इमाम हुसैन अ. के इस कथन से समझ में आता है कि "मैं सुख व आनंद की ज़िंदगी जीने या फ़साद फैलाने के लिए नहीं जा रहा हूँ, बल्कि मेरा उद्देश्य, इस्लामी उम्मत का सुधार और अपने नाना पैग़म्बरे इस्लाम (स.अ) और अपने बाबा अली इब्ने अबी तालिब की सुन्नत पर चलना है।
19 नवंबर 2013 - 20:30
समाचार कोड: 482818
कर्बला की घटना और हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के कथनों पर नज़र डालने से, आशूरा के जो संदेश हमारे सामने आते हैं उनमें से एकः