अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी (अबना) की रिपोर्ट के अनुसार आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी नें आज दर्से ख़ारिज के लेक्चर के दौरान क़ुम की मस्जिदे आज़म में छात्रों को सम्बोधित करते हुए तकफ़ीरियों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि तकफ़ीरी संगठन एक अल्पसंख्यक संगठन है लेकिन उनके काम पहले स्टेप पर मुसलमानों के लिये बहुत ख़तरनाक हैं और प्रतिदिन बेगुनाह मुसलमानों को ख़ून में तड़पाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तकफ़ीरी शिया और सुन्नी पर रहम नहीं करते और बिना किसी आदार के बेगुनाह इन्सानों का ख़ून बहाते हैं। आयतुल्लाहिल उज़मा मकारिम शीराज़ी नें आगे कहा कि तकफ़ीरी विचारों को मानने वाले संगठनों से दूसरा बड़ा ख़तरा इस्लाम और इस्लामी दुनिया को है क्योंकि इन संगठनों की करतूतों की वजह से इस्लाम के पाक और साफ़ चेहरे पर दाग़ डालने की कोशिश की जा रही है और इस्लाम को एक हिंसक धर्म के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि रसूलल्लाह स. दया और कृपा के पैग़म्बर हैं लेकिन तकफ़ीरियों नें इस्लाम की खिचांव की ताक़त को घृणा में बदल दिया है और यही इस्लाम के दुश्मनों के लिये बहाना और हथियार है कि वह दुनिया में इस्लाम के ख़िलाफ़ होने वाले कामों को बढ़ावा दे सकें। उन्होंने कहा कि तकफ़ीरियों का तीसरा ख़तरा इन्सानियत को है और वह यह है कि तकफ़ीरियों ने प्रत्येक क्षेत्र को अस्थिरता में डाला और इन्सान इन्सान के लिये ही ख़तरा समझे जाते हैं और हमें इन विचारों के मानने वालों के सामने चुप नहीं बैठना चाहिये।
14 अक्टूबर 2013 - 20:30
समाचार कोड: 472697
आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी नें आज दर्से ख़ारिज के लेक्चर के दौरान क़ुम की मस्जिदे आज़म में छात्रों को सम्बोधित करते हुए तकफ़ीरियों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि तकफ़ीरी संगठन एक अल्पसंख्यक संगठन है लेकिन उनके काम पहले स्टेप पर मुसलमानों के लिये बहुत ख़तरनाक हैं और प्रतिदिन बेगुनाह मुसलमानों को ख़ून में तड़पाया जा रहा है।