अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी (अबना) की रिपोर्ट के अनुसार बहरैन में 14 फ़रवरी 2011 को शुरू होने वाला जनता का शांतिपूर्ण आंदोलन लगातार जारी है और दूसरी तरफ़ से आले ख़लीफ़ा के द्वारा जनता के दमन का सिलसिला भी जारी है और इसको आले सऊद समेत अमरीका और ब्रिटेन का समर्थन प्राप्त हैजबकि अन्तर्राष्ट्रीय संगठन अपनी ख़ामोशी से इन अमानवीय क़दमों का समर्थन कर रहे हैं इसलिये आले ख़लीफ़ा की सरकार अपनी पूरी ताक़त लगाकर आज़ादी के साथ किये जाने वाले आंदोलन को पूरी तरह से कुचलने के लिये लगी हुई है।मोहम्मद बिन अब्दुल जलील बहरैन के इन्क़ेलाब के एक सौ तेरहवें शहीद हैं जिनको आले ख़लीफ़ा के ख़ूँख़ार लोगों नें गाड़ी से टक्कर मार कर शहीद कर दिया।बहरैन के इन्क़ेलाब 14 फ़रवरी के नौजवानों के संगठन नें ऐलान किया कि शहीद मोहम्मद अब्दुल जलील करबा बाद की सड़कों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिये इन्तेज़ाम में व्यस्त थे ताकि सरकार जल्लाद प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शन कारियों को गाड़ियों से टक्कर मार कर घायल या क़त्ल न कर सकें कि इसी बीच ख़लीफ़ी जल्लादों की गाड़ियों नें इस क्षेत्र पर धावा बोल दिया और उस बीस साल के नौजवान को एक गाड़ी नें टक्कर मार कर सड़क पर घसीटा जिस से वह मौक़े पर ही शहीद हो गया।
17 सितंबर 2013 - 19:30
समाचार कोड: 464490
बहरैन में 14 फ़रवरी 2011 को शुरू होने वाला जनता का शांतिपूर्ण आंदोलन लगातार जारी है और दूसरी तरफ़ से आले ख़लीफ़ा के द्वारा जनता के दमन का सिलसिला भी जारी है और इसको आले सऊद समेत अमरीका और ब्रिटेन का समर्थन प्राप्त है