रूसी राष्ट्रपति नें ज़ोर देकर कहा कि मैं आपको यह बता सकता हूँ कि कौन लोग युद्ध चाहते हैं। यह देश अमरीका, तुर्की, कैनेडा, सऊदी अरब और फ़्रांस हैं जबकि ब्रिटेन के लोग इस क़दम के लिये अपने प्रधानमंत्री की तरफ़ से समर्थन किये जाने के ख़िलाफ़ हैं। उन्होंने कहा कि अब यह देखते हैं कि कौन कौन से देश सीरिया पर अमरीकी समर्थन किये जाने के ख़िलाफ़ हैं। रूसी राष्ट्रपति नें इन देशों के नाम गिनवाते हुए कहा कि रूस, चीन. हिन्दोस्तान, इन्डोनेशिया, अर्जेन्टाईना, ब्राज़ील, दक्षिण अफ़रीक़ा और इटली वह देश हैं जो अमरीका के एक तरफ़ा हमले के ख़िलाफ़ हैं।
रूस के राष्ट्रपति नें आगे कहा कि अगर सीरिया पर हमला किया गया तो मास्को दमिश्क़ की मदद करेगा। उन्होंने कहा कि क्या हम सीरिया की मदद करेंगे? हाँ ज़रूर करेंगे। हम इस समय भी सीरिया की मदद कर रहे हैं। उन्हें हथियार दे रहे हैं और आर्थिक क्षेत्र में सीरिया का साथ दे रहे हैं।
रूस के राष्ट्रपति नें इस बात की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि अगर अमरीका सीरिया की सरकार पर रासायनिक हथियारों के प्रयोग का आरोप लगा रहा है तो उसे सीरिया के ख़िलाफ़ ठोस सुबूत भी पेश करने चाहिये, जिसमें वह पूरी तरह से असफल रहा है।
चीन के राष्ट्रपति नें भी बराक ओबामा से मुलाक़ात में कहा कि वह सीरिया पर फ़ौजी हमले के अपने इरादे को बदल दें। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को कोई भी क़दम उठाने से पहले उसके बारे में सही से सोच लेना चाहिये।
संयुक्त राष्ट्र के जनरल सिक्रेट्ररी बान की मून नें भी शुक्रवार को एक बार फिर सीरिया के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की फ़ौजी बर्बरता का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की परमीशन के बिना किया गया कोई हमला क़ानूनी नहीं हो सकता।