8 सितंबर 2013 - 19:30
सऊदी अरब के बहुत से क्षेत्र, सीरियन मिसाईलों का निशाना बनेंगे।

सऊदी अरब पर अधिकार जमाये आले सऊद परिवार पिछले तीन दशकों से इस्लामी देशों का नामो निशान मिटा डालने की भरपूर कोशिशों में लगा हुआ है। एक बार इस परिवार ने इराक की मदद करके ईरान पर हमला करवाया और उसके बाद अमेरिका की मदद कर के इराक को नष्ट करने की कोशिश की।

सऊदी अरब पर अधिकार जमाये आले सऊद परिवार पिछले तीन दशकों से इस्लामी देशों का नामो निशान मिटा डालने की भरपूर कोशिशों में लगा हुआ है। एक बार इस परिवार ने इराक की मदद करके ईरान पर हमला करवाया और उसके बाद अमेरिका की मदद कर के इराक को नष्ट करने की कोशिश की।

इसी तरह लेबनान और फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध नष्ट करने की उनकी कोशिशें भी किसी से छिपी नहीं हैं। और अब यह लोग एक और इस्लामी प्रतिरोध और इस्लामी देश सीरिया को अमेरिकी मिसाइलों और अपने पेट्रोल डॉलर द्वारा बर्बाद करने पर तुले हैं।

सऊदियों की वर्तमान गतिविधियां आग से नहीं बल्कि उनके अपने वुजूद से खेलने के समान हैं। इसलिए कि इस बार उन लोगों ने एक ग़लत पत्ता खेला है जिसके नतीजे में अब तक तीस करोड़ डॉलर का नुकसान उठा चुके हैं। बश्शार असद हुकूमत को गिराने की उनकी कोशिशों की विफ़लता के बाद बाद चूँकि खुद किसी तरह की एकतरफा कार्रवाई की हिम्मत नहीं रखते इसलिए अमेरिका के दामन से लिपट रहे हैं ताकि इस तरह सीरिया और इस देश की सरकार को निशाना बना सकें।

सऊदियों ने क्षेत्र की शक्तिशाली सेनाओं और देशों को तबाह व बर्बाद करने के लिए एक भी मिनट बर्बाद नहीं किया है और न ही कर रहे हैं। लेकिन उनकी अपनी सेना के नाकारेपन की हालत यह है कि करोड़ों डॉलर ख़र्च करने के बावजूद यमन के अलहौसी आंदोलन के साथ होने वाली सीमित सी लड़ाई में भी हार गई।

इस्लामी जगत के लिए नासूर सऊदियों का कहना है कि वह सीरिया पर हमले में सीधे भाग लेंगे, जिसका मतलब यह होगा कि एक तरफ अमेरिका का खर्च भी उठाएंगे और दूसरी ओर सीरिया के खिलाफ़ अपनी सैन्य शक्ति का भी प्रयोग करेंगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार भी यह परिवार खुद को बचा ले जाएगा? सीरिया सेना अपने देश के हजारों नागरिकों का खून बहाने वाले सऊदियों के हस्तक्षेप का कोई जवाब नहीं देगी? क्या सीरिया सऊदियों के खिलाफ उपनी जबर्दस्त मिसाइल शक्ति का इस्तेमाल नहीं करेगा?

इस रिपोर्ट में सीरिया की सेना की ओर से मिसाइल हमलों के लिए निर्दिष्ट सऊदी अरब के कुछ लक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी। जिसके तहत पन्द्रह सौ किमी की सीमा के अंदर सीरिया की मिसाइलों की पहुंच में आने वाले कुछ सऊदी रणनीतिक लक्ष्यों का उल्लेख किया जा रहा है:

1 . सैन्य लक्ष्य: सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े हथियार गोदाम रखने वाले देशों में से एक है। इस देश ने पिछले कुछ दशकों में अरबों डॉलर खर्च करके विभिन्न देशों से हथियार इकट्ठा किये है जिनकी विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा की जा रही है। लेकिन सीरिया सेना के लिए वह सैन्य लक्ष्य ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं जिन्हें निशाना बनाने से सऊदी अरब की रक्षा शक्ति में कमी आ जाएगी।

तबूक: यह प्राचीन शहर इस समय सऊदी अरब का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र बन चुका है यहां बुत सो रिसर्च सेंटर और फैसल के नाम पर एक सैन्य हवाई अड्डा स्थित है, जिसमें एफ 15 लड़ाकू विमान, मेराज और फ्रांस के राफ़ाइल लड़ाकू विमान हैं। दमिश्क से इस शहर की दूरी महज पांच सौ पचास किलोमीटर है। इसलिए उसे सीरिया अपने मध्य दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों से भी निशाना बना सकता है।

रियाद: सऊदी अरब की राजधानी सीरिया के सुवैदा प्रांत से तेरह सौ दो किलोमीटर हवाई दूरी पर स्थित है यहां का अन्तर्राष्ट्रीय खालिद हवाई अड्डा एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र माना जाता है। सऊदी राजधानी के निशाना बनने की स्थिति में हालात का नक्शा बदल सकता है। यहाँ शाही महलों के अलावा आले सऊद परिवार के अधिकांश सदस्यों के आवास स्थल स्थित हैं। इस शहर पर लगने वाला एक मिसाइल भी डरपोक सऊदियों को जंगलों की राह दिखा सकता है।

अल-ख़रजः यहाँ एक महत्वपूर्ण हथियार केंद्र पाया जाता है। रियाद के दक्षिण पूर्व में स्थित इस शहर में प्रिंस सुल्तान के नाम पर स्थापित महत्वपूर्ण हवाई अड्डे के अलावा युद्ध उपकरण तैयार करने वाली सऊदी कंपनी भी मौजूद है। आसपास के पहाड़ों पर सऊदियों ने चीनी संरचना के दूर तक मार करने वाले मिसाइल भी स्थापित कर रखे हैं। अल-ख़रज सीरिया के दक्षिणी प्रांत सुवैदा से तेरह सौ नब्बे किलोमीटर हवाई दूरी पर स्थित है। इस आधुनिक शहर की संरचना पर सऊदी गर्व करते दिखाई देते हैं।

ज़ोहरान सैन्य हवाई अड्डा: सऊदी अरब के सबसे बड़े हवाई अड्डों में से एक, ज़ोहरान सैन्य हवाई अड्डा फ़ार्स की खाड़ी के पास स्थित है और सीरिया के दक्षिण पूर्व से उसका फासला लगभग चौदह सौ पचास किलोमीटर है। सीरिया के दूर तक मार करने वाले मिसाइल उसे आसानी से निशाना बना सकते हैं।

इस सूची में और भी कई सऊदी सैन्य केन्द्र हैं जिनसे सीरिया सेना और सैटेलाइट का उपयोग करने वाले उसके सहयोगी परिचित हैं और निसंदेह वह सीरिया के मिसाइलों का निशाना बनेंगे।

2. औद्योगिक केंद्र: सऊदी अरब में उद्योग का मतलब तेल के भंडार हैं। यह देश दुनिया को सबसे अधिक तेल निर्यात करता है और इसके लिए उसके पास दो बड़ी बंदरगाहें हैं। रासुत तनूरह नामक बंदरगाह फ़ार्स की खाड़ी के तट पर दमाम शहर में और सीरिया के सुवैदा प्रांत से चौदह सौ पचास किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तेल की बंदरगाह के पास ही बकीक नामक एक बड़ी रिफाइनरी भी है जिसे निशाना बनाना सऊदियों को व्यवहारिक रुप से विकलांग बना सकता है।

सऊदी अरब की दूसरी बड़ी तेल बंदरगाह लाल सागर के तट पर स्थित है। यनबअ बंदर नाम की यह बंदरगाह दरअसल एक पेट्रोलियम सिटी और सऊदी अरब की ओर से पश्चिमी देशों और अमेरिका को तेल निर्यात करने का मुख्य केंद्र है। छोटे बड़े अनगिनत तेल के भंडार से भरपूर यह क्षेत्र सीरिया की दक्षिण सीमाओं से नौ सौ पचास किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। प्रतिदिन एक करोड़ गैलन तेल निर्यात करने वाली इन दो महत्वपूर्ण बंदरगाहों के लक्ष्य बनने से तेल की कीमतों में भयानक हद तक बढ़ोत्तरी हो सकती है।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार बंदरगाहों को निशाना बनाना सीरियाई सेना की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए यहां गिरने वाला सीरिया का हर मिसाइल एक लंबे समय तक आग के खतरनाक शोले भड़का और बंदरगाह को जला सकता है।

जद्दा: सऊदी अरब की दूसरी राजधानी कहा जाने वाला शहर, जद्दा इस देश के शाहज़ादों की अय्याशी का केंद्र है। व्यवहारिक रूप से यहाँ वहाबी मुल्लाओं का कोई प्रभाव नहीं है। जद्दा दमिश्क से तेरह सौ पचास किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इसमें कोई संदेह नहीं अगर संभवतः कोई बड़ी लड़ाई छिड़ती है तो उसे जरूर निशाना बनाया जाएगा।

उक्त लक्ष्यों के अलावा, सऊदियों की सबसे बड़ी कमजोरी उनके पानी फ़िल्टर करने वाले केन्द्र हैं जहां बिजली भी पैदा की जाती है। यह केन्द्र फ़ार्स की खाड़ी और हिंद लाल सागर के तट पर फैले हुए हैं और रोज़ाना नागरिकों को अरबों लीटर पीने का पानी प्रदान करते हैं। उन्हें अगर निशाना बना लिया गया तो सऊदी अरब के रेगिस्तान और प्यासे हो जाएंगे।

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