4 सितंबर 2013 - 19:30
ओबामा के लिए कांग्रेस को तैयार करना आसान नहीं

अमरीकी सिनेट की विदेशी मामलों की समिति ने सदन में पेश किए जाने वाले मसौदे को पास तो कर दिया है किंतु इस मामले में समिति के सदस्यों में गहरा मतभेद देखने में आया है जिसके चलते यह अटकलें लगाई जा रही हैं संसद से सीरिया पर हमले की अनुमति ले पाना बाराक ओबामा की टीम के लिए आसान काम नहीं होगा।

इस स्थिति को देखते हुए ओबामा की टीम ने अमरीकी सांसदों को मनाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास तेज़ कर दिए हैं और सांसदों के साथ बंद दरवाज़ों के पीछे बैठकें हो रही है जिनमें सीरिया पर आक्रमण से अमरीका को होने वाले लाभ के बारे में बताया जा रहा है। सीरिया पर हमले से अमरीका का आर्थिक लाभ इस लिए होगा क्योंकि इस हमले में जो भी हथियार प्रयोग होगा और जितने सैनिक भाग लेंगे उनका पूरा ख़र्च सऊदी अरब तथा फ़ार्स खाड़ी के कुछ अन्य अरब देश वहन करेंगे किंतु इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और लीबिया युद्ध के परिणामों से खिन्न अमरीकी सांसदों को मनाना आसान नहीं है। यही कारण है कि बृहस्पतिवार को ओबामा के डिप्टी नेशनल सेक्युरिटी एडवाइज़र टोनी ब्लिन्केन ने नेताओं से मुलाक़ात करने के साथ ही कई टीवी चैनलों के कार्यक्रमों में भाग लेकर सीरिया पर हमले की वकालत की। उन्होंने कहा कि यदि सीरिया की स्थिति को अमरीकी जनता देखेगी तो वह राष्ट्रपति ओबामा के अनुरोध का समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि यह अनिश्चित काल तक चलने वाली लड़ाई नहीं है, सीरिया की ज़मीन पर सैनिक नहीं उतारे जाएंगे, यह अफ़ग़ानिस्तान नहीं है, यह इराक़ नहीं है और यह लीबिया भी नहीं है।

अमरीकी विदेश मंत्री जान कैरी ने सांसदों से अपनी मुलाक़ात में कहा कि मैं नहीं समझता कि हम युद्ध करने जा रहे हैं, राष्ट्रपति ओबामा सैनिक कार्यवाही की अनुमति मांग रहे हैं किंतु यह एसी लड़ाई नहीं है जिसमें अमरीकियों को उलझना पड़े।

सिनेट की विदेशी मामलो की समिति में राष्ट्रपति ओबामा के प्रस्ताव पर हुए मतदान में दस वोट इसके पक्ष में और सात वोट इसके विरोध में पड़े जिससे पता चलता है कि अमरीकी सिनेट में इस प्रस्ताव को पास करवाना आसान नहीं होगा।

उधर राष्ट्रपति बाराक ओबामा को रूस के सेंट पीटर्ज़बर्ग में भी सीरिया के मामले में अमरीका की रणनीति पर भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।