2 सितंबर 2013 - 19:30
हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की शहादत का दिन।

सादिक़े आले मुहम्मद अबू अब्दिल्लाह, जाफ़र बिन मुहम्मद बिन अली बिन हसन बिन अली बिन अबी तालिब (अ) शियों के छठे इमाम हैं। जिन्होंने अपने वालिद (पिता) इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद 7 ज़िलहिज्जा सन 114 हिजरी क़मरी को उनकी वसीयत के अनुसार इमामत की ज़िम्मेदारी सम्भाली।

सादिक़े आले मुहम्मद अबू अब्दिल्लाह, जाफ़र बिन मुहम्मद बिन अली बिन हसन बिन अली बिन अबी तालिब (अ) शियों के छठे इमाम हैं। जिन्होंने अपने वालिद (पिता) इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद 7 ज़िलहिज्जा सन 114 हिजरी क़मरी को उनकी वसीयत के अनुसार इमामत की ज़िम्मेदारी सम्भाली।इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) जुमे या मंगल की सुबह 17 रबी अव्वल सन 80 हिजरी क़मरी को मदीना में पैदा हुए। (1)आपकी मां का नाम फ़ातिमा बिन्ते क़ासिम बिन मोहम्मद बिन अबी बक्र था और आपकी कुन्नियत (उपनाम)  "उम्मे फरवह" थी।आफ अमीरूल मोमेनीन अली इब्ने अबी तालिब अ. के वफादार सहाबी हज़रत मुहम्मद बिन अबी बक्र की बेटी थीं। अपने समय की महिलाओं में सबसे सदाचार, पाक चरित्र और आध्यात्मिक बड़ाई में मशहूर थीं। और इमाम सादिक़ (अ) ने आपके व्यक्तित्व के बारे में कहा: मेरी माँ उन औरतों में से है जो ईमान लाईं और तक़वा को चुना और नेक काम करने वाली थीं और अल्लाह अच्छे व नेक काम करने वालों को दोस्त रखता है। (2)आप बनी उमय्या की हुकूमत के आख़री और बनी अब्बास हुकूमत के शुरूआती युग में ज़िंदगी गुज़ार रहे थे और बनी उमय्या के खिलाफ़ सार्वजनिक विद्रोह और बनी अब्बास का लोगों के साथ धार्मिक भावनाओं के साथ शोषण करके लोगों से अहलेबैत अ. के नाम पर बैअत लेकर हुकूमत पर काबिज होने को नजदीक से देख रहे थे और इन परिस्थितियों में शियों और अहलेबैत (अ) के चाहने वालों के मार्गदर्शन की गंभीर ज़िम्मेदारी को अंजाम देते रहे। इमाम सादिक़ (अ) अब्दुल मलिक बिन मर्वान <पांचवां अमवी खलीफा> के युग में पैदा हुए और उसके बाद शेष 8 बनी उमय्या के ख़लीफ़ाओं और दो ​​अब्बासी ख़लीफाओं कि जिनका नाम नीचे दिये गए हैं समकालीन थे और उनमें से ज्यादातर की ओर से आपको सताया गया और आप पर अत्याचार होते रहे।1. वलीद बिन अब्दुल मलिक2. सुलैमान बिन अब्दुल मलिक3. उमर बिन अब्दुल मलिक4. यज़ीद बिन अब्दुल मलिक5. हेशाम बिन अब्दुल मलिक6. वलीद बिन यज़ीद7. यज़ीद बिन वलीद8. मर्वान बिन मुहम्मद9. अबुल अब्बास सफ़्फ़ाह10. मंसूर दवानिक़ी (3)आखिरकार 65 साल की उम्र में मंसूर दवानिकी के हाथों आपकी शहादत हुई।आपकी की शहादत की तारीख के बारे में दो दृष्टिकोण बयान हुए हैं। कुछ ने 15 रजब सन 148 हिजरी क़मरी और कुछ ने 25 शव्वाल सन 148 में बयान किया है और मशहूर शिया इतिहासकारों के नज़दीक दूसरी राय यानी 25 शव्वाल ही विश्वसनीय है।आपकी शहादत के बाद हज़रत इमाम मूसा काज़िम (अ) ने भाइयों और परिवार वालों के साथ आपके ग़ुस्ल व कफ़न के बाद आपको बक़ीअ में दफ़नाया। ( 4 )यहाँ शेख मुफ़ीद (रह) का आपके बारे में लिखते हैं:و كان الصادق جعفر بن محمد بن علي بن الحسين عليہم السلام من بين اخوتہ خليفہ ابيہ محمد بن علي عليہما السلام و وصيہ، القائم بالامامہ من بعدہ، و برز علي جماعتہم بالفضل، و كان انبہہم ذاكرا، و اعظہم قدرا، و اجّلہم في العامہ و الخاصہ، و نقل الناس عنہ من العلوم ما سارت بہ الركبان، و انتشر ذكرہ في البلدان و لم ينقل عن احد من اھل بيتہ العلماء ما نقل عنہ، و لا لقي احد منہم من اھل الاثار و نقلہ الاخبار و لا نقلوا عنہم كما نقلوا عن ابي عبداللہ، فان اصحاب الحديث قد جمعوا اسماء الرواۃ عنہ من الثقاۃعلي اختلافہم في الاراء و المقالات فكانوا اربعہ آلاف رجل.( 5 )स्रोत :1 - ताजुल मवालीद (अल्लामा तबरसी ) , पेज 43 , जिंदगानी चहारदा मासूमीन (अ) (अनुवादालाम अलवर ) , पी 376 , मनतहय ालामाल ( तो उन्हों अब्बास क़ुम्मी ) , ग 2 , पी 1202 - मुनतहल आमाल, भाग 2 , पेज 1213 – ताजुल मवालीद , पेज 434 -वक़ायेउल अय्याम (शेख़ अब्बास क़ुम्मी ) , पेज 81 , मुनतहल आमाल , Yeग 2 , पेज 1555 – अल-इरशाद , पेज 525