आले ख़लीफ़ा सरकार के लोगों नें शनिवार की रात बहरैन के अल मआमीर क्षेत्र में मस्जिदे इमाम रज़ा अ. पर फ़ायरिंग की जिसके नतीजे में मस्जिद में आग लग गई। आले ख़लीफ़ा सरकार के लोगों नें फ़रवरी 2011 से जब जनता का शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू हुआ है, अब तक दसियों मस्जिदों और इमाम बाड़ों को शहीद कर दिया गया है।
फ़रवरी 2011 से अब तक दसियों बहरैनी लोग शहीद, सैंकड़ों गिरफ़्तार और पचास से ज़्यादा मस्जिदें शहीद हो चुकी हैं और आले ख़लीफ़ा सरकार की मस्जिदों को शहीद करने की पॉलिसी पूरी तरह से जारी है।
दूसरी तरफ़ यमन के राष्ट्रपति नें इस बात को माना है कि बहरैन की जनता के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को कुचलने में उनका भी हाथ है। यमन के राष्ट्रपति ने यमन की राजधानी सनआ में पुलिस अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए इस बात माना है कि बहरैनी जनता के प्रदर्शनों को कुचलने की कोशिश में वह भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि बहुत से यमनी पुलिस अधिकारी बहरैनी सिक्योरिटी फ़ोर्स का साथ देने के लिये बहरैन में पूरी तरह सक्रिय हैं। बहरैन में फ़रवरी 2011 से सरकार की पॉलिसी के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी है जिसको कुचलने के लिये सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और क्षेत्र के विभिन्न अरब राष्ट्रों के फ़ौजी वहाँ मौजूद हैं।
