20 अगस्त 2013 - 19:30
वहाबियत इस्लामी दुनिया की सबसे बड़ी मुसीबत।

हज़रत आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी ने इस बात पर जोर देते हुए कि दुश्मन मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहा है और दोनों पक्षों को बहका कर आपसी दुश्मनी पैदा करना चाहता है, कहाः उल्माए इस्लाम संयम और समझदारी से दुश्मन के षड़यंत्र का पर्दा फ़ाश क

21 अगस्त 2013 हज़रत आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी ने इस बात पर जोर देते हुए कि दुश्मन मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहा है और दोनों पक्षों को बहका कर आपसी दुश्मनी पैदा करना चाहता है, कहाः उल्माए इस्लाम संयम और समझदारी से दुश्मन के षड़यंत्र का पर्दा फ़ाश करें।
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार क़ुम के मशहूर मरजए-तक़लीद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा मकारिम शीराज़ी ने ' मॉडरेशन और इस्लामी उम्मत की एकता में उल्मा की भूमिका' के शीर्षक से आयोजित होने वाली कॉन्फ़्रेंस में जो कल पवित्र शहर मशहद में दफ़्तरे तब्लीग़ाते इस्लामी के कार्यालय के कॉन्फ़्रेंस हाल में आयोजित हुई, समझदारी और संयम को इंसान के वुजूद के बाक़ी रहने का कारण बताया।
आपने वहाबियत को इस्लामी दुनिया की सबसे बड़ी मुसीबत जाना और कहा: आश्चर्य की बात है कि लाखों निर्दोषों और बेगुनाहों का ख़ून बहाने वाली वहाबियत खुद को सल्फ़ी कहती है, अंबिया के के सलफ़ कभी भी मुसलमानों के खिलाफ़ आत्मघाती हमले नहीं करते थे, बेगुनाहों का मस्जिदों में नरसंहार नहीं करते थे और अम्बिया इन बातों के विरोधी थे, वास्तव में वहाबियत के यह विचार बिदअत हैं।