मिस्र के सबसे बड़े इस्लामी संगठन जामिया अल-अज़हर के एक उस्ताद ने सल्फ़ी वहाबी विचारधारा को इस्लामी दुनिया के लिए अपमान का कारण बताते हुए सल्फ़ी वहाबी विचारधारा का मुकाबला करने की ताकीद की है।प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सुन्नी और शिया उलमा की लेबनान में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई जिसमें अहले सुन्नत और शिया उलमा ने सल्फ़ी वहाबी विचारधारा को इस्लाम की बदनामी का कारण बताते हुए सल्फ़ी विचारधारा का मुकाबला करने का फैसला किया है।इस बैठक में सीरिया के अहले सुन्नत उल्मा गठबंधन के प्रमुख डॉ. शेख तौफीक बूती, ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर के उच्च सलाहकार अयातुल्ला तसख़ीरी, धर्म एकता परिषद के प्रमुख आयतुल्लाह अराकी, अहले सुन्नत मामलों में ईरानी राष्ट्रपति के सलाहकार मौलवी इसहाक मदनी और जामिया अल-अज़हर के उस्ताद डाक्टर मंसूर महमूद अहमद करीमा ने हिस्सा लिया. यह बैठक बैरूत में ईरानी राजदूत के निवास पर आयोजित हुई।इस बैठक में जामिया अल-अज़हर के उस्ताद डाक्टर मंसूर महमूद अहमद करीमा ने अपनी स्पीच में सल्फ़ी वहाबी विचारधारा की निंदा की और उसे ग़लत रास्ते पर डालने पर चिंता जताते हुए कहा कि जामिया अल-अज़हर के कंधों पर इस तरह की बहकी हुई विचारधाराओं का मुक़ाबला करने के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और सल्फ़ी वहाबी विचारधारा इस्लाम और नबी-ए-करीम (स) की शिक्षाओं और सीरत व जीवन शैली के बिल्कुल विपरीत है।इस बैठक में सीरिया, मिस्र, जॉर्डन, इराक, अफ़ग़ानिस्तान, मलेशिया, रूस, बहरैन, तातारिस्तान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, तुर्की, ओमान और ईरान के उल्मा ने हिस्सा लिया।
6 जुलाई 2013 - 19:30
समाचार कोड: 438006
मिस्र के सबसे बड़े इस्लामी संगठन जामिया अल-अज़हर के एक उस्ताद ने सल्फ़ी वहाबी विचारधारा को इस्लामी दुनिया के लिए अपमान का कारण बताते हुए सल्फ़ी वहाबी विचारधारा का मुकाबला करने की ताकीद की है।