6 जुलाई 2013 - 19:30
30 लोगों की मौत, 300 से अधिक ज़ख़्मी।

प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार मिस्र में अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी के समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़पों में 30 लोग मारे गये हैं और 300 से अधिक ज़ख़्मी हुए हैं। केवल इस्कंदरिया शहर में मोहम्मद मुरसी के समर्थकों व विरोधियों के बीच झड़प में 12 मारे लोग मारे गये और 200 से ज़्यादा घायल हुए जबकि क़ाहेरा में 5 लोग मारे गए। अलअरीश में नामालूम आदमियों द्वारा 5 पुलिस कर्मी मारे गए तथा बाक़ी दूसरी घटनाओं में मारे गए.....

प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार मिस्र में अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी के समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़पों में 30 लोग मारे गये हैं और 300 से अधिक ज़ख़्मी हुए हैं।केवल इस्कंदरिया शहर में मोहम्मद मुरसी के समर्थकों व विरोधियों के बीच झड़प में 12 मारे लोग मारे गये और 200 से ज़्यादा घायल हुए जबकि क़ाहेरा में 5 लोग मारे गए। अलअरीश में नामालूम आदमियों द्वारा 5 पुलिस कर्मी मारे गए तथा बाक़ी दूसरी घटनाओं में मारे गए।   मिस्र में मोहम्मद मुरसी के सैन्य विद्रोह द्वारा अपदस्थ किए जाने की घटना पर जुमे की नमाज़ के बाद प्रतिद्वंदवी धड़ों के बीच भीषण झड़पें हुईं।इस्कंदरिया में 12 लोगों के मारे जाने से उत्तरी अफ़्रीक़ी देश मिस्र में शुक्रवार की झड़प में कुल मरने  वालों की संख्या 30 हो गयी है।कल इससे पूर्व इख़्वानुल मुस्लेमीन के नेता मोहम्मद बदी ने कहा जनता द्वारा चुने गए पहले राष्ट्रपति के विरुद्ध सैन्य विद्रोह अवैध और ग़ैरक़ानूनी है और जब तक मुरसी को राष्ट्रपति की हैसियत से बहाल नहीं किया जाता उस समय तक दसियों लाख लोग सड़कों पर रहेंगे।मोहम्मद बदी ने शुक्रवार को क़ाहेरा की राबिया अल-अदविया मस्जिद में दसियों हज़ार की संख्या में इख़्वानुल मुस्लेमीन के समर्थकों के बीच भाषण के दौरान यह बात कही।ग़ौरतलब है मिस्र में बुध 3 जुलाई को सेनाध्यक्ष जनरल अब्दुल फ़त्ताह अल-सीसी ने मोहम्मद मुरसी को अपदस्थ कर दिया और इस देश के राजनैतिक संकट के समाधान के लिए संविधान को भंग कर दिया।अल-सीसी ने कहा कि फिर से संसदीय चुनाव होंगे और उन्होंने सर्वोच्च संवैधानिक कोर्ट के प्रमुख अदली मंसूर को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया।ज्ञात रहे मिस्री जनता ने 25 जनवरी 2011 को इस देश के इस्राईल समर्थक तानाशाह हुस्नी मुबारक के विरुद्ध क्रान्ति शुरु की थी जो 11 फ़रवरी 2011 को कामयाब हुई और इस तरह हुस्नी मुबारक के 30 वर्षीय तानाशाही का अंत हुआ था।