हज़रत आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी ने मिस्र में शियों की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए कहा हम सभी इस्लामी और इंटर-नेशनल संगठनों और समितियों के साथ साथ इस अत्याचार की निंदा करते हुए तक़रीब मज़ाहिबे इस्लामी संगठन और इस्लामी गठबंधन के सिलसिले से मिस्र के उल्मा से बातचीत के लिए हौज़ ए इल्मिया क़ुम की पूरी तय्यारी का ऐलान करते हैं।
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार हज़रत आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी ने भेजे गए अपने बयान में मिस्र में कट्टरपंथी वहाबियों के हाथों कुछ शियों की शहाइस्लामी दुनियात पर कड़ी टिप्पणी का करते हुए कहा : पूरे इस्लामी राष्ट्र से हमारी मांग है कि इस अत्याचार के मुक़ाबले में चुप न रहें बल्कि कड़ी कार्यवाही करें और मिस्र हुकूमत से भी हमारा अनुरोध है कि अत्याचारियों को उनके इस अपराध के सज़ा दे।
बयान इस प्रकार हैः
بسم الله الرحمن الرحیم
मिस्र के जीज़ह राज्य में इमाम महदी (अ.ज) के जन्मदिवस पर होने वाले समारोह में वहाबी तकफ़ीरियों के हमले के नतीजे में मरने वाले चार शिया और उनके साथ प्रमुख शिया मौलाना शेख़ हसन शुहाता की शोकाकुल खबर ने हम सभी को ग़म में डाल दिया, आज इस्लामी दुनिया की सबसे बड़ी मुश्किल वहाबी हैं जो अपनी बर्बरता द्वारा मुसलमानों की इज़्ज़त, हैसियत व सम्मान और इस्लामी आधारों को नुकसान पहुंचाने में व्यस्त हैं, और वह इस्लाम जो प्यार,, मुहब्बत और भाईचारे का मज़हब है उसे आतंकवाद, ख़ून ख़राबे और बेरहमी का दीन बताने में व्यस्त हैं।
अफ़सोस मिस्र को जायोनी साज़िशों का सामना है, जिसमें मिस्र की शांति और स्थिरता को निशाना बनाया गया है और इस संबंध में उचित कार्यवाही न करने की सूरत में यह आग पूरी इस्लामी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगी, पिछले दो वर्षों में जातीय चरमपंथ ईसाइयों के खिलाफ रहा था और अब अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के मानने वालों के खिलाफ आतंक और कट्टरपंथ की मौज ने सर उभारा है, मिस्र में अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के मानने वालों की बनियादें स्थिर, गहरी और पुरानी हैं, इस तरह के अत्याचार मिस्र के दीनदार और शरीफ लोगों के स्वभाव के खिलाफ़ हैं।
उनके अत्याचारों के आधार तकफीरी वहाबियों के वह प्रोपगंडे और प्रचार हैं जिसे यह गुट विभिन्न मज़हबों के खिलाफ़ अंजाम देने में व्यस्त है और प्रोपगंडे में दूसरों का खून बहाना वैध जानता है, अफसोस हालिया दिनों में इन अपराधों में बढ़ोत्तरी आई है जो इस्लामी ब्रादरी में खून खराबे का सबब बन सकती हैं।
हम दूसरे सभी इस्लामी और इंटर-नेशनल संगठनों और समितियों के साथ साथ इस अत्याचार की घोर निंदा करते हुए तक़रीब मज़ाहिबे इस्लामी संगठन और इस्लामी गठबंधन के सिलसिले से मिस्र के उल्मा से बातचीत के लिए हौज़ ए इल्मिया क़ुम की पूरी तय्यारी का ऐलान करते हैं, हम अल-अज़हर के उल्मा और सभी बड़ी हस्तियों जिन्होंने इस घिनौने अत्याचार की निंदा की है, उनके आभारी हैं, और सभी इस्लामी उल्मा से हमारी मांग है कि इस अत्याचार के मुक़ाबले में चुप न रहें बल्कि कड़ी कार्यवाही करें और मिस्र हुकूमत से भी हमारा अनुरोध है कि अत्याचारियों को उनके इस अपराध के सज़ा दे। अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि इस्लाम और मुसलमानों को इस गुमराह और पदभ्रष्ट समूह की बुराई से बचाये रखे।
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार हज़रत आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी ने भेजे गए अपने बयान में मिस्र में कट्टरपंथी वहाबियों के हाथों कुछ शियों की शहाइस्लामी दुनियात पर कड़ी टिप्पणी का करते हुए कहा : पूरे इस्लामी राष्ट्र से हमारी मांग है कि इस अत्याचार के मुक़ाबले में चुप न रहें बल्कि कड़ी कार्यवाही करें और मिस्र हुकूमत से भी हमारा अनुरोध है कि अत्याचारियों को उनके इस अपराध के सज़ा दे।
बयान इस प्रकार हैः
بسم الله الرحمن الرحیم
मिस्र के जीज़ह राज्य में इमाम महदी (अ.ज) के जन्मदिवस पर होने वाले समारोह में वहाबी तकफ़ीरियों के हमले के नतीजे में मरने वाले चार शिया और उनके साथ प्रमुख शिया मौलाना शेख़ हसन शुहाता की शोकाकुल खबर ने हम सभी को ग़म में डाल दिया, आज इस्लामी दुनिया की सबसे बड़ी मुश्किल वहाबी हैं जो अपनी बर्बरता द्वारा मुसलमानों की इज़्ज़त, हैसियत व सम्मान और इस्लामी आधारों को नुकसान पहुंचाने में व्यस्त हैं, और वह इस्लाम जो प्यार,, मुहब्बत और भाईचारे का मज़हब है उसे आतंकवाद, ख़ून ख़राबे और बेरहमी का दीन बताने में व्यस्त हैं।
अफ़सोस मिस्र को जायोनी साज़िशों का सामना है, जिसमें मिस्र की शांति और स्थिरता को निशाना बनाया गया है और इस संबंध में उचित कार्यवाही न करने की सूरत में यह आग पूरी इस्लामी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगी, पिछले दो वर्षों में जातीय चरमपंथ ईसाइयों के खिलाफ रहा था और अब अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के मानने वालों के खिलाफ आतंक और कट्टरपंथ की मौज ने सर उभारा है, मिस्र में अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के मानने वालों की बनियादें स्थिर, गहरी और पुरानी हैं, इस तरह के अत्याचार मिस्र के दीनदार और शरीफ लोगों के स्वभाव के खिलाफ़ हैं।
उनके अत्याचारों के आधार तकफीरी वहाबियों के वह प्रोपगंडे और प्रचार हैं जिसे यह गुट विभिन्न मज़हबों के खिलाफ़ अंजाम देने में व्यस्त है और प्रोपगंडे में दूसरों का खून बहाना वैध जानता है, अफसोस हालिया दिनों में इन अपराधों में बढ़ोत्तरी आई है जो इस्लामी ब्रादरी में खून खराबे का सबब बन सकती हैं।
हम दूसरे सभी इस्लामी और इंटर-नेशनल संगठनों और समितियों के साथ साथ इस अत्याचार की घोर निंदा करते हुए तक़रीब मज़ाहिबे इस्लामी संगठन और इस्लामी गठबंधन के सिलसिले से मिस्र के उल्मा से बातचीत के लिए हौज़ ए इल्मिया क़ुम की पूरी तय्यारी का ऐलान करते हैं, हम अल-अज़हर के उल्मा और सभी बड़ी हस्तियों जिन्होंने इस घिनौने अत्याचार की निंदा की है, उनके आभारी हैं, और सभी इस्लामी उल्मा से हमारी मांग है कि इस अत्याचार के मुक़ाबले में चुप न रहें बल्कि कड़ी कार्यवाही करें और मिस्र हुकूमत से भी हमारा अनुरोध है कि अत्याचारियों को उनके इस अपराध के सज़ा दे। अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि इस्लाम और मुसलमानों को इस गुमराह और पदभ्रष्ट समूह की बुराई से बचाये रखे।