4 जून 2013 - 19:30
सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई ने लाखों लोगो को सम्बोधित किया।

इस्लामी इंक़ेलाब के संस्थापक हज़रत इमाम खुमैनी (रह) के मज़ार में कल उनकी चौबीसवीं बरसी के अवसर पर देश व विदेश से लाखों मोमिन और इंक़ेलाबकारी लोगों ने इकट्ठा हो कर इमाम ख़ुमैनी की याद मनाई और ईरानी जनता ने एक बार फिर इस्लामी इंक़ेलाब के संस्थापक के साथ अपनी निष्ठा, आपसी एकता, देश और क़ौम के सम्मान का शानदार नमूना पेश किया

इस्लामी इंक़ेलाब के संस्थापक हज़रत इमाम खुमैनी (रह) के मज़ार में कल उनकी चौबीसवीं बरसी के अवसर पर देश व विदेश से लाखों मोमिन और इंक़ेलाबकारी लोगों ने इकट्ठा हो कर इमाम ख़ुमैनी की याद मनाई और ईरानी जनता ने एक बार फिर इस्लामी इंक़ेलाब के संस्थापक के साथ अपनी निष्ठा, आपसी एकता, देश और क़ौम के सम्मान का शानदार नमूना पेश किया और अपने स्वर्गीय और प्रिय लीडर को एक बार फिर नए सिरे से वचन दिया।इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने विशाल और बेमिसाल सभा को सम्बोधित करते हुये हज़रत इमाम खुमैनी (रह) के अल्लाह तआला, जनता और आत्मविश्वास पर गहरे विश्वास और यक़ीन को इस्लामी इंक़ेलाब की कामयाबी और ताक़त के साथ तरक्की का कारण बताया और इलेक्शन के सम्बंध में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों और जनता के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें करते हुए कहा: अल्लाह तआला की सहायता और मदद से ईरानी राष्ट्र अगले दस दिनों में जबरदस्त जोश का प्रदर्शन करेगी और 24 ख़ुरदाद बराबर 14 जून के इम्तेहान में कामयाब और सफल हो जाएगी।इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने 15 ख़ुरदाद सन 1342 हिजरी शम्सी के सार्वजनिक आंदोलन को ईरान के इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हज़रत इमाम खुमैनी (रह) की 13 ख़ुरदाद 1343 हिजरी शम्सी में स्पीच और फिर उनकी हिरासत के बाद तेहरान, क़ुम और देश के कुछ अन्य शहरों में बड़े स्तर पर अवामी मौज और लहर पैदा हो गई और जनता ने राजशाही के सामने उल्मा और मराजे के साथ अपने गहरे सम्बंधों का शानदार नमूना पेश किया।इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने जनता और उल्मा के बीच आपसी सम्पर्क व सम्बंध को जन आंदोलन की प्रगति और और अंत में आंदोलन की कामयाबी की गारंटी बताते हुए कहा जब जनता मैदान में आते हैं और उनकी भावनाएं और विचारधारा किसी आंदोलन की हिमायत करते हैं तो वह आंदोलन जारी रहते हुए कामयाब हो जाता है।इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने 15 ख़ुरदाद सन 1342 हिजरी शम्सी की घटना में ताग़ूत के अत्याचार और उसकी बेरहमी और संगदिली के उजागर होने की ओर इशारा करते हुए कहा इस घटना पर अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार के ठेकेदारों की चुप्पी महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल थी अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने इस घटना के बारे में कभी कोई एतेराज़ नहीं किया।इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने ज़ोर देते हुए कहा कि इन सभी कठिनाइयों और समस्याओं के बावजूद हज़रत इमाम खुमैनी (रह) जनता के सहयोग और समर्थन एक महान आध्यात्मिक, आसमानी, ऐतिहासिक और इंटर-नेशनल लीडर बन गए।इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने हज़रत इमाम खुमैनी (रह) के तीन महत्वपूर्ण विश्वासों की ओर इशारा करते हुए कहा: अल्लाह तआला पर विश्वास, जनता पर विश्वास और अपने संकल्प और इरादे पर विश्वास, यह तीनों विश्वास इमाम खुमैनी (रह) के अंदर स्पष्ट रूप से मौजूद थे उनके सभी फैसले और इरादे इन तीनों विश्वासों पर आधारित थे।इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने कहा कि हज़रत इमाम खुमैनी (रह) अपने दिल की गहराई से जनता के साथ बातचीत करते थे और जनता भी उनकी बात पर दिलोजान से लब्बैक कहती थी, मैदान में उपस्थित होते थे और प्रतिरोध और पाईदारी का प्रदर्शन करते थे जिसकी वजह से यह आंदोलन कामयाबी की ओर बढ़ा और आखिरकार किसी देश की मदद और सहयोग के बिना कामयाब हो गया।इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने हज़रत इमाम खुमैनी (रह) अल्लाह तआला पर विश्वास, जनता पर विश्वास और आत्मविश्वास की तीनों किस्मों की व्याख्या करते हुए कहा कि हज़रत इमाम खुमैनी (रह) का अल्लाह पर मजबूत और स्थिर विश्वास और उन्हें अल्लाह तआला के वादों पर पूरा यक़ीन था इसलिए वह हर काम और हर कदम केवल और केवल अल्लाह के लिए उठाते थे।इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने कहा कि हज़रत इमाम खुमैनी (रह) का क़ौम पर गहरा विश्वास और यक़ीन था और उनका यकीन था कि अगर ईरानी राष्ट्र को योग्य और उचित लीडर मिल जाए तो वह सूरज के समान हर क्षेत्र में चमकती रहेगी।इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने कहा कि हज़रत इमाम खुमैनी (रह) की नज़र में जनता सबसे ज़्यादा प्रिय थी और क़ौम के दुश्मन सबसे ज़्यादा घृणित थे और यही विश्वास उन साम्राज्यवादी शक्तियों से मुक़ाबले और उनके मुकाबले में डटे रहने का मुख्य कारण था जो ईरानी राष्ट्र के साथ दुश्मनी रखती थीं। www.leader.ir