4 जून 2013 - 19:30
इस्लामी जागरूकता कान्फ़्रेंस का आयोजन

मौलाना सय्यद कल्बे जवाद नक़वी नें कहा कि इस्लामी जागरूकता का मतलब वैसे तो बहुत आसान है लेकिन इसका क्षेत्र बहुत बड़ा है

ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब के संस्थापक आयतुल्लाह इमाम ख़ुमैनी रह. की याद में हुसैनिया मोहम्मद अली शाह, लखनऊ में आयोजित इस्लामी जागरूकता कान्फ़्रेंस को सम्बोधित करते हुए मौलाना ग़ुलाम रज़ा महदवी (अल-मुस्तफ़ा इंटर-नेशनल युनीवर्सिटी के प्रतिनिधि) नें कहा कि इस समय मुसलमानों की ग़रीबी और शैक्षिक पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण यह है कि मुसलमानों नें अपनी तहज़ीब, संस्कृति तथा इतिहास से दूरी कर ली है। हमारे कल्चर व तहज़ीब को दूसरे मज़हब के लोगों नें अपना लिया है लेकिन हम उसे अपनाने में अपनी बेइज़्ज़ती समझते हैं। सच्चाई यह है कि अगर मुसलमान ग़रीबी और जेहालत के अंधेरे से निकलना चाहता है और समाज में अपना खोया हुआ मान सम्मान पाना चाहता है तो उसे इस्लामी सिस्टम व नियमों को वैसे ही मानना होगा जैसे कि क़ुरआन और नबीए करीम नें बताया है।कान्फ़्रेंस को सम्बोधित करते हुए मजलिसे उल्माए हिन्द के जनरल सिक्रेटरी मौलाना सय्यद कल्बे जवाद नक़वी नें कहा कि इस्लामी जागरूकता का मतलब वैसे तो बहुत आसान है लेकिन इसका क्षेत्र बहुत बड़ा है। इस्लामी जागरूकता यानी मुसलमान अपने हक़ के लिये हर स्तर पर जागें। हम केवल इस्लामी सिस्टम को मानें, क़ुरआनी और रसूल स. के व्यक्तित्व की रौशनी में अपनी समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करें।