अमेरिकी सेना के संयुक्त कमान के पूर्व प्रमुख जनरल रिचर्ड मिर्ज़ ने एक बयान में कहा है कि सीरिया की जंग (एक देश की नहीं) बल्कि एक इलाक़े की जंग है जिसमें हिज़्बुल्ला की भागीदारी ने विरोधी सशस्त्र समूहों को एक ख़राब हालत में ग्रस्त कर दिया है।
जनरल मिर्ज़ सी, बी एस चैनल से बातचीत कर रहे थे, उनका कहना था:
''सीरिया जंग पूरे क्षेत्र की लड़ाई है और इसके पड़ोसी देशों में फैल जाने की संभावना है. सुनने में आया है कि इराकी लड़ाकू भी सीरिया में लड़ रहे हैं, इस लड़ाई के दायरे की बढ़ जाने की संभावना अधिक है। अगर बश्शार असद सरकार ज्यादा दबाव का शिकार होती है तो सीरिया का संकट लेबनान बल्कि जॉर्डन तक फैल सकता है।''
उन्होंने कहा:
"बश्शार असद सरकार का साथ देने के लिए हिज़्बुल्ला के सिपाहियों के पूरी तरह आगे आने से विद्रोही आतंकवादी एक खराब स्थिति में ग्रस्त हो चुके हैं और अब उनके लिए किसी तरह की प्रगति का संभावना नहीं है।''
जनरल मिर्ज़ का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब सीनेट सदस्य बॉब कवर्कर और रॉबर्ट मंडर ने हाल ही में कांग्रेस में एक बिल पेश किया है जिसके पास होने की स्थिति में सीरिया ''विद्रोहियों 'के लिये हथियारों के वितरण को कानूनी वैधता हासिल हो जायेगी।
इसी दौरान दैनिक अल-हयात ने खुलासा किया है कि सीनेटर जॉन मैककेन ने सीरिया में विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाक़े का गुप्त दौरा करके विरोधी लड़ाकों से मुलाकात की है।
दैनिक अख़बार ने लिखा है:
''मैककेन ने सीरिया की ज़मीन पर तीन विद्रोही समूहों से मुलाकात की है जिनमें से कुछ अल-कुसैर से आए थे। इस बैठक के दौरान सेनेटर ने लड़ाई में ईरान और हिज़्बुल्ला के रोल पर विशेष ध्यान दिया।'' अखबार ने जानकार सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी सीनेटर ने उत्तरी सीमा से देश में प्रवेश कर पंद्रह किलोमीटर का रास्ता तय कर विद्रोहियों तक पहुँचे। जहां उन्होंने फ्री सीरियन आर्मी के अट्ठारह कमांडरों और उच्च सैन्य परिषद के प्रमुख सलीम इदरीस से मुलाक़ात की।
सूत्रों ने बताया कि मैककेन ने हलब, हम्स, अल-कुसैर और अदलब के विद्रोही नेताओं से तीन बैठकें कीं और इस दौरान सीरिया जंग में ईरान और हिज़्बुल्ला के रोल के बारे में विभिन्न सवाल पूछे।
गौरतलब है कि फिलहाल त्युनिस, लीबिया और सऊदी अरब आदि के हजारों आतंकवादी सीरिया में मौजूद हैं और उन्हें पश्चिमी देश, इस्राईल और रूढ़िवादी अरब देशों की आर्थिक और सैन्य मदद हासिल है लेकिन पिछले दो महीनों में उक्त आतंकवादियों को सीरियाई सेना की ओर से भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
जनरल मिर्ज़ सी, बी एस चैनल से बातचीत कर रहे थे, उनका कहना था:
''सीरिया जंग पूरे क्षेत्र की लड़ाई है और इसके पड़ोसी देशों में फैल जाने की संभावना है. सुनने में आया है कि इराकी लड़ाकू भी सीरिया में लड़ रहे हैं, इस लड़ाई के दायरे की बढ़ जाने की संभावना अधिक है। अगर बश्शार असद सरकार ज्यादा दबाव का शिकार होती है तो सीरिया का संकट लेबनान बल्कि जॉर्डन तक फैल सकता है।''
उन्होंने कहा:
"बश्शार असद सरकार का साथ देने के लिए हिज़्बुल्ला के सिपाहियों के पूरी तरह आगे आने से विद्रोही आतंकवादी एक खराब स्थिति में ग्रस्त हो चुके हैं और अब उनके लिए किसी तरह की प्रगति का संभावना नहीं है।''
जनरल मिर्ज़ का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब सीनेट सदस्य बॉब कवर्कर और रॉबर्ट मंडर ने हाल ही में कांग्रेस में एक बिल पेश किया है जिसके पास होने की स्थिति में सीरिया ''विद्रोहियों 'के लिये हथियारों के वितरण को कानूनी वैधता हासिल हो जायेगी।
इसी दौरान दैनिक अल-हयात ने खुलासा किया है कि सीनेटर जॉन मैककेन ने सीरिया में विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाक़े का गुप्त दौरा करके विरोधी लड़ाकों से मुलाकात की है।
दैनिक अख़बार ने लिखा है:
''मैककेन ने सीरिया की ज़मीन पर तीन विद्रोही समूहों से मुलाकात की है जिनमें से कुछ अल-कुसैर से आए थे। इस बैठक के दौरान सेनेटर ने लड़ाई में ईरान और हिज़्बुल्ला के रोल पर विशेष ध्यान दिया।'' अखबार ने जानकार सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी सीनेटर ने उत्तरी सीमा से देश में प्रवेश कर पंद्रह किलोमीटर का रास्ता तय कर विद्रोहियों तक पहुँचे। जहां उन्होंने फ्री सीरियन आर्मी के अट्ठारह कमांडरों और उच्च सैन्य परिषद के प्रमुख सलीम इदरीस से मुलाक़ात की।
सूत्रों ने बताया कि मैककेन ने हलब, हम्स, अल-कुसैर और अदलब के विद्रोही नेताओं से तीन बैठकें कीं और इस दौरान सीरिया जंग में ईरान और हिज़्बुल्ला के रोल के बारे में विभिन्न सवाल पूछे।
गौरतलब है कि फिलहाल त्युनिस, लीबिया और सऊदी अरब आदि के हजारों आतंकवादी सीरिया में मौजूद हैं और उन्हें पश्चिमी देश, इस्राईल और रूढ़िवादी अरब देशों की आर्थिक और सैन्य मदद हासिल है लेकिन पिछले दो महीनों में उक्त आतंकवादियों को सीरियाई सेना की ओर से भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।