30 मई 2013 - 19:30
अमेरिका ने अपना रवैया नहीं बदला तो अफ़गानिस्तान को दूसरा वियतनाम बना देंगे।

अफ़ग़ानिस्तान के कुछ सीनेट मिम्बर्स ने काबुल-वाशिंगटन रक्षा अनुबंध पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपनी पॉलीसी न बदली तो वह अफ़ग़ानिस्तान को दूसरे वियतनाम में बदल देंगे।

अफ़ग़ानिस्तान के कुछ सीनेट मिम्बर्स ने काबुल-वाशिंगटन रक्षा अनुबंध पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपनी पॉलीसी न बदली तो वह अफ़ग़ानिस्तान को दूसरे वियतनाम में बदल देंगे।फ़ॉर्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान सीनेट के कुछ सदस्यों ने काबुल-वाशिंगटन रक्षा अनुबंध की आलोचना की और कहा कि उक्त समझौते के नतीजे में अब तक अफ़ग़ानिस्तान के हालात में कोई बदलाव नहीं आया है।सीनेट के एक मिम्बर बिलक़ीस रौशन का कहना था:'जिन लोगों ने पिछले साल अमेरिका के साथ रक्षा समझौते के पक्ष में ग्रीन कार्ड उठाए थे वह आज देखें कि शांति की स्थिति किस हद तक खराब हो चुकी है।'एक दूसरे मिम्बर हिदायतुल्लाह रिहाई ने कहा अमेरिका के साथ रक्षा समझौते को एक साल बीत चुके हैं लेकिन अब तक न तो शांति की स्थिति में सुधार हुआ है और न ही लोगों की ज़िंदगी बदली है। स्पष्ट है कि इस समझौते का अमल में कोई फायदा नहीं है।उन्होंने कहा:'ऐसी रिपोर्टें मिल रही हैं कि 2014 तक अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका के स्थायी सैनिक ठिकाने स्थापित हो जाएगें, अफ़गान जनता इसकी विरोधी हैं।'इसी सिलसिले में वाएकंदी के सीनेट मिम्बर अली अकबर जमशीदी ने अपने बयान में कहा:'जैसा कि आप देख रहे हैं हर चौबीस घंटे में बड़ी संख्या में आम लोगों का ख़ून बहाया जा रहा है और हुकूमत की मौजूदा स्थिति की ओर कोई ख़ास तवज्जो नहीं है।'इसी दौरान अफ़गान पार्लियामेंट के स्पीकर फ़ज़्ल हादी मुस्लिम यार ने भी अमेरिका के साथ रक्षा समझौते पर अफसोस और अमेरिकी नीतियों की निंदा की। उनके शब्द थे:'अगर अमेरिकी सरकार की ओर से मौजूदियां नीतियां जारी रहीं तो अफ़ग़ान जनता अमेरिकी सेना के खिलाफ उठ खड़े होंगे और अफ़ग़ानिस्तान अमेरिका के लिए दूसरा वियतनाम बन जाएगा।'