अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के दावों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र जांच समिति के एक सदस्य ने कहा: सीरिया विरोधी संगठन रासायनिक हथियार इस्तेमाल कर रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार जांचकर्ताओं की जांच से पता चलता है कि अमेरिका और पश्चिमी नेताओं के दावों के बावजूद सीरिया विरोधी संगठनों ने 'सीरीन'' नामक घातक गैस का इस्तेमाल किया है न कि सीरिया सरकार ने।
फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार जांचकर्ताओं के हाथों ऐसे सबूत लगे हैं जिनसे यह साबित होता है कि अमेरिका और पश्चिमी अधिकारियों के दावों के बावजूद सीरिया सरकार के विरोधी संगठनों ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है न कि बश्शार असद सरकार ने।
रूस रेडियो ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सीरिया के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के आज़ाद जांच कमीशन के एक सदस्य ने कहा कि अभी तक कोई ऐसा सबूत नहीं मिला है कि जिससे यह साबित हो सके कि सीरियाई सेना ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है।
इस कमीशन के एक सदस्य Carla Del Ponte ने कहा कि हमारे जांचकर्ताओं ने पीड़ितों के पड़ोसी मुल्कों के डॉक्टरों से इंटरव्यू लिए हैं और अस्पतालों से आंकड़े जमा किए हैं।
पिछले सप्ताह रिपोर्टों के अनुसार कहा जा सकता है कि सीरीन गैस का इस्तेमाल हुआ है लेकिन सुबूत इतने पक्के नहीं कि उन्हें खारिज न किया जा सकता हो। संयुक्त राष्ट्र के आज़ाद जांच कमीशन के इस सदस्य ने सीरीन का इस्तेमाल करने वालों के बारे में साफ शब्दों में कहा कि सीरिया विरोधी या विद्रोहियों ने गैस का इस्तेमाल किया है न कि सरकार ने।
सीरीन गैस, बश्शार असद के खिलाफ पश्चिम का मनोवैज्ञानिक हमला।
अमेरिकी और पश्चिमी अधिकारी अब तक सीरिया सरकार पर सीरीन जैसी घातक गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाते आ रहे थे और इस तरह उन्होंने बश्शार असद की सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर मनोवैज्ञानिक हमले शुरू रखे थे।
सीरीन एक एसी ख़तरनाक जहरीली गैस है कि जिसमें मिसटर्ड और क्लोरीन गैस से अधिक साइटोटोकस्टी है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दो सप्ताह पहले दावा किया था कि उनके पास ऐसे सबूत हैं जिनसे यह पता चलता है कि बश्शार असद ने विरोधी संगठनों के खिलाफ सीरीन गैस का इस्तेमाल किया है।
रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के दावे तो बश्शार असद की सरकार के खिलाफ लंबे समय से विभिन्न मौकों पर किए जा रहे थे लेकिन पहली बार एक ज़ायोनी सैनिक अधिकारी ने सरकार पर सीरीन जैसी घातक गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाया था। इस खबर के प्रसारित होते ही पश्चिमी अधिकारियों और मीडिया द्वारा सीरिया के खिलाफ नये नये प्रचार होना शुरू हो गए।
पिछले महीने बश्शार असद ने ऐलान किया था कि विरोधियों ने हलब राज्य के खानुल-असल इलाक़े में रासायनिक हथियार इस्तेमाल किए हैं जिसके लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा जांच कराने की भी मांग भी की थी।
सीरिया के हालात कैसे खराब हुए?
याद रहे कि मार्च 2011 से सीरिया में हालात खराब हैं जिसकी वजह से अब तक काफी संख्या में लोगों की जानें जा चुकी हैं जिनमें सेना और पुलिस के लोग भी शामिल हैं।
सीरिया सरकार का कहना है कि इन हालात के पीछे विदेशी तत्वों का हाथ है इसके अलावा कई रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि सरकार के खिलाफ लड़ने वालों में एक बड़ी संख्या विदेशियों की है।
सीरिया सरकार शुरू से ही कुछ पश्चिमी देशों और उनके क्षेत्रीय समर्थकों ख़ास कर सऊदी अरब, क़तर और तुर्की पर आरोप लगा रही है कि यह देश सरकार विरोधी सशस्त्र संगठनों को वित्तीय सहायता और हथियार सप्लाई कर रहे हैं।
लेकिन अमेरिकी सरकार ने हमेशा सीरिया सरकार के विरोधी संगठनों के डायरेक्ट या इंडायरेक्ट समर्थन करने से इंकार किया है जबकि सरकार के न चाहने के बावजूद कई बार वाशिंगटन की विद्रोही गुटों की हिमायत का पर्दा फाश हो चुका है यहां तक कि अब विश्लेषकों को भी अमेरिका द्वारा सीधे सैन्य समर्थन न होने पर शक होने लगा है।
मिसाल के तौर पर अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने मार्च में अपनी एक रिपोर्ट में लिखा था कि सी. आई. ए ने पार साल सीरिया सरकार के विरोधियों को 3500 टन हथियार दिया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार जांचकर्ताओं की जांच से पता चलता है कि अमेरिका और पश्चिमी नेताओं के दावों के बावजूद सीरिया विरोधी संगठनों ने 'सीरीन'' नामक घातक गैस का इस्तेमाल किया है न कि सीरिया सरकार ने।
फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार जांचकर्ताओं के हाथों ऐसे सबूत लगे हैं जिनसे यह साबित होता है कि अमेरिका और पश्चिमी अधिकारियों के दावों के बावजूद सीरिया सरकार के विरोधी संगठनों ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है न कि बश्शार असद सरकार ने।
रूस रेडियो ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सीरिया के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के आज़ाद जांच कमीशन के एक सदस्य ने कहा कि अभी तक कोई ऐसा सबूत नहीं मिला है कि जिससे यह साबित हो सके कि सीरियाई सेना ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है।
इस कमीशन के एक सदस्य Carla Del Ponte ने कहा कि हमारे जांचकर्ताओं ने पीड़ितों के पड़ोसी मुल्कों के डॉक्टरों से इंटरव्यू लिए हैं और अस्पतालों से आंकड़े जमा किए हैं।
पिछले सप्ताह रिपोर्टों के अनुसार कहा जा सकता है कि सीरीन गैस का इस्तेमाल हुआ है लेकिन सुबूत इतने पक्के नहीं कि उन्हें खारिज न किया जा सकता हो। संयुक्त राष्ट्र के आज़ाद जांच कमीशन के इस सदस्य ने सीरीन का इस्तेमाल करने वालों के बारे में साफ शब्दों में कहा कि सीरिया विरोधी या विद्रोहियों ने गैस का इस्तेमाल किया है न कि सरकार ने।
सीरीन गैस, बश्शार असद के खिलाफ पश्चिम का मनोवैज्ञानिक हमला।
अमेरिकी और पश्चिमी अधिकारी अब तक सीरिया सरकार पर सीरीन जैसी घातक गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाते आ रहे थे और इस तरह उन्होंने बश्शार असद की सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर मनोवैज्ञानिक हमले शुरू रखे थे।
सीरीन एक एसी ख़तरनाक जहरीली गैस है कि जिसमें मिसटर्ड और क्लोरीन गैस से अधिक साइटोटोकस्टी है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दो सप्ताह पहले दावा किया था कि उनके पास ऐसे सबूत हैं जिनसे यह पता चलता है कि बश्शार असद ने विरोधी संगठनों के खिलाफ सीरीन गैस का इस्तेमाल किया है।
रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के दावे तो बश्शार असद की सरकार के खिलाफ लंबे समय से विभिन्न मौकों पर किए जा रहे थे लेकिन पहली बार एक ज़ायोनी सैनिक अधिकारी ने सरकार पर सीरीन जैसी घातक गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाया था। इस खबर के प्रसारित होते ही पश्चिमी अधिकारियों और मीडिया द्वारा सीरिया के खिलाफ नये नये प्रचार होना शुरू हो गए।
पिछले महीने बश्शार असद ने ऐलान किया था कि विरोधियों ने हलब राज्य के खानुल-असल इलाक़े में रासायनिक हथियार इस्तेमाल किए हैं जिसके लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा जांच कराने की भी मांग भी की थी।
सीरिया के हालात कैसे खराब हुए?
याद रहे कि मार्च 2011 से सीरिया में हालात खराब हैं जिसकी वजह से अब तक काफी संख्या में लोगों की जानें जा चुकी हैं जिनमें सेना और पुलिस के लोग भी शामिल हैं।
सीरिया सरकार का कहना है कि इन हालात के पीछे विदेशी तत्वों का हाथ है इसके अलावा कई रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि सरकार के खिलाफ लड़ने वालों में एक बड़ी संख्या विदेशियों की है।
सीरिया सरकार शुरू से ही कुछ पश्चिमी देशों और उनके क्षेत्रीय समर्थकों ख़ास कर सऊदी अरब, क़तर और तुर्की पर आरोप लगा रही है कि यह देश सरकार विरोधी सशस्त्र संगठनों को वित्तीय सहायता और हथियार सप्लाई कर रहे हैं।
लेकिन अमेरिकी सरकार ने हमेशा सीरिया सरकार के विरोधी संगठनों के डायरेक्ट या इंडायरेक्ट समर्थन करने से इंकार किया है जबकि सरकार के न चाहने के बावजूद कई बार वाशिंगटन की विद्रोही गुटों की हिमायत का पर्दा फाश हो चुका है यहां तक कि अब विश्लेषकों को भी अमेरिका द्वारा सीधे सैन्य समर्थन न होने पर शक होने लगा है।
मिसाल के तौर पर अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने मार्च में अपनी एक रिपोर्ट में लिखा था कि सी. आई. ए ने पार साल सीरिया सरकार के विरोधियों को 3500 टन हथियार दिया है।