इमाम मूसा काज़िम अ. की नज़र मेंइमाम मूसा काज़िम अ. फ़रमाते हैं: जनाबे फ़ातिमा स. सिद्दीक़ा (बहुत ज़्यादा सच्ची) और शहीदा हैं। सुलैमान जाफ़र कहते हैं: मैंने इमाम काज़िम अ. को यह कहते सुना: जिस घर में मर्दों का नाम मोहम्मद, अली, हसन, हुसैन, जाफ़र, अबदुल्लाह और औरतों का नाम फ़ातिमा हो उस घर में ग़रीबी नहीं होगी।इमाम अली रेज़ा अ. की नज़र मेंइमाम अली रेज़ा अ. अपने पुरखों की ज़बान से यह बयान करते हैं कि एक बार रसूले ख़ुदा स. नें हज़रत अली अ. से फ़रमाया: तीन चीज़ें ऐसी हैं जो आपको दी गईं हैं और मुझे नहीं दी गईं। इमाम अली अ. नें पूछा कि वह कौन सी तीन चीज़ें हैं जो आपको दी गईं हैं और मुझे नहीं दी गईं? रसूले ख़ुदा स.अ. नें फ़रमाया: सबसे पहली यह की मेरे जैसा इन्सान आपका ससुर है लेकिन मुझे ऐसा ससुर नहीं मिला। दूसरी चीज़ आपको फ़ातिमा जैसी बीवी मिली है और ऐसी बीवी मुझे नहीं मिली है। तीसरे यह कि आपको हसन व हुसैन जैसे बेटे दिये गए हैं जो मुझे नहीं दिये गए। इमामे रेज़ा अ. नें अपने पुरखों की ज़बान से यह भी बयान किया है कि रसूले ख़ुदा स.अ नें फ़रमाया: अली अ. और फ़ातिमा अ. की शादी के बाद ख़ुदा नें फ़रमाया: अगर मैंने अली को पैदा न किया होता तो आपकी बेटी फ़ातिमा के लिये ज़मीन पर कोई पति और जीवन साथी न मिलता।इमाम मोहम्मद तक़ी अ. की नज़र मेंइमाम मोहम्मद तक़ी अ. के एक साथी मूसा इब्ने क़ासिम नें एक बार इमाम अली अ. से कहा: मैंने हज में आपकी दादी (जनाबे फ़ातिमा) की तरफ़ से भी ज़ियारत की। इमाम नें जवाब में फ़रमाया: इस काम को ज़्यादा से ज़्यादा किया करो क्योंकि यह तुम्हारा सब से अच्छा काम होगा। ज़करिया इब्ने आदम कहते हैं: हम इमामे रज़ा अ. के पास बैठे थे कि इमाम मोहम्मद तक़ी अ. अन्दर आए। उस समय इमाम की उम्र चार साल से ज़्यादा नहीं थी। जब वह बैठे तो उन्होंने अपने दोनों हाथ ज़मीन पर रखे और सर आसमान की तरफ़ किया और काफ़ी देर तक सोचते रहे। इमाम रेज़ा अ. नें फ़रमाया: मेरी जान तुम पर फ़िदा हो! ऐसे क्या देख रहे हो और क्या सोच रहे हो? इमाम नें जवाब दिया: अपनी दादी फ़ातिमा स. पर किये जाने वाले ज़ुल्म के बारे में सोच रहा हूँ।इमामे अली नक़ी अ. की नज़र मेंइमामे नक़ी अ. जनाबे फ़ातिमा के नाम के बारे में रसूले ख़ुदा की ज़बानी फ़रमाते हैं: मेरी बेटी फ़ातिमा का नाम फ़ातिमा इस लिये रखा गया क्योंकि ख़ुदा उन्हें और उनके चाहने वालों को जहन्नम की आग से दूर रखेगा। इमामे हसन असकरी अ. की नज़र मेंइमामे हसन असकरी अ. रसूले ख़ुदा की ज़बान से बयान फ़रमाते हैं: जिस समय ख़ुदा नें आदम और हव्वा को पैदा किया तो वह दोनों जन्नत में अपने आप पर गर्व करते थे। आदम हव्वा से कहते थे: ख़ुदा नें हमसे अच्छी कोई भी चीज़ पैदा नहीं की है। ख़ुदा नें जिबरईल से कहा: मेरे इन दोनों बन्दों को फ़िरदौसे बरीं में ले जाओ। जब उन दोनों को वहाँ ले जाया गया तो वहाँ उनकी नज़र एक महिला पर पड़ी जिन्होंने जन्नत के कपड़े पहने हुए थे और सर पर नूर का एक ताज था। उनका नूर पूरी जन्नत में फैला हुआ था। हज़रत आदम नें जिबरईल से पूछा: मेरे दोस्त जिबरईल यह महान महिला जिनके नूर से सारी जन्नत नूरानी हो गई है कौन हैं? जिबरईल नें कहा: यह आपकी नस्ल से आने वाले एक रसूल हज़रत मोहम्मद स. की बेटी हैं। पूछा: इनके सर पर कैसा ताज है? कहा: यह उनके पति अली इब्ने अबी तालिब हैं। पूछा इनके कानों में जो दो झुमके हैं यह क्या हैं? कहा यह इनके बेटे हसन व हुसैन हैं। हज़रत आदम नें कहा: मेरे दोस्त क्या इन्हें मुझसे पहले पैदा किया गया है? जवाब दिया हाँ। यह आपसे चार हज़र साल पहले पैदा किये गए हैं। (हालांकि उस समय उनके नूर पैदा किये गए थे।) इमामे ज़माना अज. की नज़र मेंइमामे ज़माना अज. नें फ़रमाया: रसूले ख़ुदा स. की बेटी फ़ातिमा मेरे लिये आईडियल हैं। इमामे ज़माना अज. जो कि ख़ुदा के हुक्म से ज़ाहिर होने के बाद पूरी दुनिया में एक बदलाव लाएंगे वह अपना आईडियल जनाबे फ़ातिमा स. को मानते हैं इससे बीबी ज़हरा की श्रेष्ठता का अन्दाज़ा लगाया जा सकता है।
15 अप्रैल 2013 - 19:30
समाचार कोड: 409845
इमाम मूसा काज़िम अ. फ़रमाते हैं: जनाबे फ़ातिमा स. सिद्दीक़ा (बहुत ज़्यादा सच्ची) और शहीदा हैं। सुलैमान जाफ़र कहते हैं: मैंने इमाम काज़िम अ. को यह कहते सुना: जिस घर में मर्दों का नाम मोहम्मद, अली, हसन, हुसैन, जाफ़र, अबदुल्लाह और औरतों का नाम फ़ातिमा हो उस घर में ग़रीबी नहीं होगी