काफ़ी समय से जब भी ईरान के शांतिपूर्ण एटमी प्रोग्राम को निराधार आरोपों का निशाना बनाया जाता है कई निष्पक्ष विश्लेषक जवाब में यह कहते नज़र आते हैं कि मध्य पूर्व में एकमात्र इस्राइली सरकार के पास एटमी हथियार हैं। यह विश्लेषक भूले से भी कभी तुर्की का नाम नहीं लेते कि यह देश अपनी धरती पर एटमी बम की देखभाल कर रहा है।
ताबनाक की रिपोर्ट के अनुसार तुर्की में एटमी हथियारों की मौजूदगी अपनी असामान्य स्ट्रॉटेजिक महत्व के बावजूद विश्लेषकों और राजनेताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पाती, लेकिन अल मॉनिटर नामक एनालिटिकल वेबसाइट ने पहली बार इस मामले से पर्दा उठाया और विभिन्न पहलुओं पर सैर कर चर्चा की है।
वेबसाइट ने लिखा है कि सीरिया में हिंसा से पहले दमिश्क और अंकारा में गहरे संबंध थे और उस समय तुर्की सोच भी नहीं सकता था कि केवल कुछ साल बाद उसे सीरिया से चुनौतियों का सामना करना होंगा। 2009 में सीरिया और तुर्की के बीच उच्च रक्षा सहयोग काउंसिल की बैठक हुई थी जिसमें प्रस्ताव में कहा गया कि'' दोनों ओर ने मध्य पूर्व एटमी हथियारों को ख़त्म की जरूरत पर सहमति जताते हुए ईरान के एटमी प्रोग्राम की नवीनतम स्थिति और इस हवाले से होने वाली बातचीत की समीक्षा है क्योंकि हर देश को एटमी एनेर्जी के इस्तेमाल का अधिकार है, इसलिए हम इस मामले के डिप्लोमेटिक हल पर जोर दे रहे हैं।
अल मॉनिटर के अनुसार नैटो सदस्य तुर्की का एटमी हथियारों से मुक्त मध्यपूर्व की बात करने स्पष्ट टकराव है।
'एटमी हथियारों से मुक्त मध्य पूर्व' की परिभाषा इस्राईल विरोधी नीति की थीम के रूप में 2009 की दावोस बैठक और 2010 में मावी मरमरह नामक तुर्क जहाज पर इस्राइली हमले के बाद सामने आई। इसमें शक नहीं कि एटमी हथियारों से मुक्त मध्यपूर्व की तमन्ना अच्छी बात है लेकिन अगर यह मांग तुर्की से आए तो उस पर विचार करने की जरूरत है।
तुर्की मध्य पूर्व के उन एकमात्र दो मुल्कों में से एक है जो अपनी ज़मीन पर एटमी हथियारों के देखभाल कर रहे हैं, इस्राईल के पास ऐसे हथियार की मौजूदगी सब पर रौशन है। लेकिन तुर्की के पास मिड इन अमेरिका बी इकसठ (61) एटमी हथियारों का होना ज़रा भी ढका छिपा मामला न होकर भी विश्लेषकों और राजनीतिज्ञों के विश्लेषण का विषय नहीं बनता।
तुर्की और इस्राईल में अंतर यह है कि तुर्की के शहर आदाता के पास स्थित ऐनजरलक साइट पर स्टोर किए गए एटमी बम अमेरिकी सरकार की मिलकियत है। हवा से ज़मीन पर मार करने वाले इन स्वचालित बमों की संख्या 'जरूरत के हिसाब से' 'बदलती रहती है। बी इकसठ बम संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से अपने सहयोगी नॉटो सदस्यों के लिए स्थापित सिक्योरिटी शील्ड का अहम हिस्सा हैं।
यह बम शीत युद्ध के दौरान ऐनजरलक में सोवियत संघ की तुलना में फ़ौजी ताक़त का संतुलन बनाये रखने के लिए स्थापित किए गए लेकिन अभी तक अपनी जगह पर मौजूद हैं लेकिन सूत्रों का कहना है कि तुर्की फ़ौजियों को चलाने की ट्रेनिंग नहीं दी गई है और इस मुल्क के एफ सोलह लड़ाकू विमान उन्हें कहीं ले जाने की क्षमता भी नहीं रखते हैं।
तुर्की के साथ साथ नॉटो के दूसरे सदस्य मुल्क, बेल्जियम, होलैंड, जर्मनी इटली की ज़मीनों पर भी स्थापित हैं सिवाए इटली के अन्य तीन मुल्कों ने अपनी ज़मीनों से इस बम को हटाने की मांग की है लेकिन तुर्की ने ऐसी कोई मांग की हो, इसकी संभावना नहीं हैं।
नए मध्य पूर्व के ज्यूपोलिटिक्स के मद्देनजर तुर्की के लिए बमों का महत्व दोगुना हो गया है और वह ज्यूपोलिटिक्स है सीरिया और ईरान का सामना।
सीरिया की हालात सब पर रौशन हैं यहां बग़ावत से पहले तुर्की के दमिश्क के साथ गहरे संबंध थे लेकिन हिंसा शुरू होने के बाद से तुर्की सीरिया के खिलाफ सैन्य चढ़ाई के अलावा सब कुछ कर बैठा है जो उसके बस में था।
तुर्की सरकार जो सीरिया में इख़वानुल मुस्लेमीन की समर्थित सरकार बनाना चाहती है जानती है कि उसकी कार्यवाहियां दमिश्क की ओर से दुश्मनी पर आधारित करार दिया जाएगा और इसलिए उसे सीरिया के रासायनिक हथियारों को लेकर चिंता है।
दूसरी ओर एटमी मैदान में ईरान के दिन प्रतिदिन के विकास ने तुर्की को चिंता से डाल दिया है कि अगर ईरान ने एटमी बम बनाने का इरादा कर लिया तो इलाक़े में तुर्की का महत्व बहुत कम हो जाएगा। कुछ साल पहले यह देश ईरान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इंटर-नेशनल सिस्टम को चुनौती देकर आगे बढ़ने के अवसर तलाश कर रहा था लेकिन अब उसी सिस्टम के साथ मिल कर ईरान के मुक़ाबले में खड़ा हो गया है।
बहरहाल, इन्हीं सारे कारणों की वजह से तुर्की गुप्त रूप से अपनी ज़मीन पर नॉटो मुल्कों की सिक्योरिटी शील्ड के अहम हिस्से के रूप में स्थापित किये गये एटमी बमों का समर्थक और इलाक़े के बदले हालात में अपनी
सुरक्षा की गॉरंटी समझता है।