इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने ईरान के मशहद शहर में दिये गये अपने भाषण में इस्राईल को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि इस्राईली अधिकारी कभी कभी ईरान को धमकी देते हैं लेकिन उन्हें अच्छी तरह पता है कि अगर उन्होंने कोई बेवक़ूफ़ी की तो इस्लामिक रिपब्लिक ईरान तेलअबीब और हैफा को मिट्टी में मिला देगा।ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने पिछले वर्षों की तरह नये ईरानी सौर सन के आरम्भ के अवसर पर मशहद में पैगम्बरे इस्लाम स.अ के आठवें उत्तराधिकारी इमाम रेज़ा अलैहिस्लाम के रौज़े की जियारत की और इस अवसर पर अपने भाषण में कहा कि इस्राईल की इतनी हैसियत ही नहीं है कि उसे ईरान का दुश्मन समझा जाए।उन्होंने अपनी स्पीच में कहा कि अमरीकी अधिकारियों को यह समझ लेना चाहिए कि ईरानी ऐसे चरणों से गुज़र चुका है कि अब जब दुश्मन का नाम लिया जाता है तो अमरीका का ही नाम ध्यान में आता है।सुप्रीम लीडर ने अपने भाषण में अमरीका की दुश्मनी की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति अपने सरकारी सम्बोधनों में इस तरह से ईरान की आर्थिक समस्याओं का बयान करते हैं मानो वह अपनी सफलताओं का वर्णन कर रहे हों लेकिन वह कभी भी ईरानी राष्ट्र की कामयाबी को बयान नहीं करते और करेंगे भी नहीं।ईरान की सशस्त्र सेना के सुप्रीम कमांडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि प्रतिबंधों ने अपना अवश्य छोड़ा हैं लेकिन इसके साथ ही एक बहुत बड़ी सकारात्मक बात हुई और वह यह कि इन प्रतिबंधों से ईरानी राष्ट्र की असीम क्षमताओं व योग्यताओं का प्रदर्शन हो गया और देश की संभावनाएं उजागर हो गयीं और ईरानी राष्ट्र ने यह साबित कर दिया कि अमरीका की ग़ुलामी में न रहने का मतलब पिछड़ापन नहीं होता है।
20 मार्च 2013 - 20:30
समाचार कोड: 401854
इस्राईल की इतनी हैसियत ही नहीं है कि उसे ईरान का दुश्मन समझा जाए, अमरीकी अधिकारियों को यह समझ लेना चाहिए कि ईरानी ऐसे चरणों से गुज़र चुका है कि अब जब दुश्मन का नाम लिया जाता है तो अमरीका का ही नाम ध्यान में आता है......