बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने वाली संस्था सेव दि चिल्ड्रेन ने बुधवार को कहा है कि तुर्की में सीरियाई शरणार्थियों पर किये गये एक अध्धयन से पता चलता है कि इस देश के हर तीन बच्चों में से एक को यातना, दुष्कर्म या गोली का निशाना बनाया गया है।
ब्रिटेन में स्थित इस संस्था ने इसी प्रकार सीरियाई विद्रोहियों की इस बात पर कड़ी आलोचना की है कि वे सरकार विरोधी युद्ध में और सामान आदि ढोने के लिए किशोरों को प्रयोग करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी ११ मार्च को सीरिया संकट के संबंध में अपनी एक रिपोर्ट में विदेश समर्थित सीरियाई विद्रोहियों पर सीरिया में हिंसा फैलाने का आरोप लगाया था। संरा से जुड़े आयोग ने इसी प्रकार अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीरियाई विद्रोही, बच्चों को मोर्चों पर भेजते हैं और १३ वर्ष के किशोर को भी अपने संघर्ष में शामिल करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय पक्ष, सीरिया सकंट का समाधान खोजने में विफल रहे तो इस देश में सामाजिक व आर्थिक व राजनीतिक तबाही की आशंका है।
हालिया दिनों में एक वीडियो भी जारी हुआ है जिसमें सीरियाई विद्रोहियों को बच्चों को युद्ध में प्रयोग करते दिखाया गया है। इस वीडियो में अमरीका द्वारा समर्थित एक विद्रोही गुट को एलेप्पो में यह कहते हुए दिखाया गया है कि यह छापामार हमारे साथ जब जुड़ते हैं तो बच्चों होते हैं किंतु फिर वे हत्या की मशीन में बदल जाते हैं।