बहरैन से आने वाली ख़बरों के अनुसार हम्द बिन ईसा आले ख़लीफ़ा की शाही सरकार अपनी पूरी ताक़त से पब्लिक द्वारा प्रदर्शनों को कुचलने और इंक़ेलाब को दबाने की कोशिश कर रही है। तानशाही सरकार ने इन्हीं कोशिशों के नतीजे में कोर्ट की मदद से सात प्रदर्शनकारियों को दस दस साल की जेल की सज़ा सुनवाई है जिनका अपराध केवल यह है कि उन्होंने अपने अधिकारों की मांग को लेकर पीसफ़ुल प्रदर्शनों में हिस्सा लिया जबकि अदालत ने उन दो पुलिसकर्मियों को बा इज़्ज़त बरी कर दिया जिन्हों प्रदर्शनकारियों पर हमले करके कई प्रदर्शनकारियों को शहीद और घायल कर दिया था।बहरैन के ह्युमन राइट्स वर्कर बहुत पहले से कहते आ रहे हें कि इस देश की कोर्ट इंसाफ नहीं शाही सरकार के हुक्मों को जारी करती है।इसी बीच एक अदालत ने मशहूर ह्युमन राइट्स वर्कर अब्दुल हादी अलख्वाजा की बेटी ज़ैनब ख़्वाजा को तीन महीने जेल की सज़ा सुनाई है। बहरैन की अपील कोर्ट ने उन्हें सरकारी कर्मचारियों का अपमान करने का दोषी बताते हुए यह सज़ा सुनाई।सरकार ने सिक्योरिटी फ़ोर्सेज़ के हमले में शहीद होने वाले कुछ प्रदर्शनकारियों की लाशें उनके परिवारों को लौटाने से इंकार कर दिया है जिसके विरोध में जनता प्रदर्शन कर रही है। इन प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के कारण ज़ैनब अब्दुल ख़्वाजा को गिरफ़तार किया गया था।.......166
28 फ़रवरी 2013 - 20:30
समाचार कोड: 395909
बहरैन से आने वाली ख़बरों के अनुसार हम्द बिन ईसा आले ख़लीफ़ा की शाही सरकार अपनी पूरी ताक़त से पब्लिक द्वारा प्रदर्शनों को कुचलने और इंक़ेलाब को दबाने की कोशिश कर रही है....