16 फ़रवरी 2013 - 20:30

21 फ़रवरी को एक और हमले में 56 से 90 लोग मारे गए जिन मे ज़्यादातर बच्चे और औरतें थीं। शुरू में तो सरकार पर आरोप लगाया गया लेकिन बाद में जबहतुन नसरा नें यह कह कर ज़िम्मेदारी क़ुबूल कर ली कि उसनें सरकारी फ़ौज की हथियारों की फ़ैक्ट्री को निशाना बनाया है

दो साल पहले जब सीरिया में उपद्रव शुरू हुआ तो बहुत से एनालिस्ट, विरोधियों में मतभेद और लड़ाई के काफ़ी आगे निकल जाने की चेतावनी दे रहे थे। अब यह बात सच साबित हो गई है और विरोधी धड़े एक दूसरे का नरसंहार कर रहे हैं। ताबनाक की लेबनान के दैनिक अल-सफ़ीर के हवाले से दी गई रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में जबहतुन् नसरा नामक एक संगठन नें एक हमा सूबे के सलमिया शहर पर धावा बोला है जहाँ के ज़्यादा तर लोग राष्ट्रपति बश्शार असद के विरोधी तो हैं लेकिन सरकार के विरूद्ध हथियार उठाने को सही नहीं मानते। उन पर हमले का कारण भी यही बताया गया है। इस शहर के लोग अप्रैल 2011 में विरोधियों के साथ हो गए लेकिन उनका यह क़दम भी उन्हें आतंकवादियों से न बचा सका।दूसरी ओर सीरिया से बाहर रह रहे विरोधी लीडर जो पहले सलमिया की जनता का रोना रोते नहीं थक रहे थे जबहतुन नसरा के हमले के बाद चुप्पी साधे हुए हैं।यहाँ के लोग शुरू में तो बश्शार सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन जब शान्ति पूर्ण आंदोलन पर आतंकवाद के साए बढ़ने लगे तो इन लोगों नें हाथ खींच लिया और अब विरोधियों की संख्या बहुत कम रह गई है।2013 के आते ही शहर में आतंकवादी हमले शुरू हो गए, 21 जनवरी को आत्मघाती हमले में दरजनों लोग हताहत और ज़ख़्मी हुए। 21 फ़रवरी को एक और हमले में 56 से 90 लोग मारे गए जिन मे ज़्यादातर बच्चे और औरतें थीं। शुरू में तो सरकार पर आरोप लगाया गया लेकिन बाद में जबहतुन नसरा नें यह कह कर ज़िम्मेदारी क़ुबूल कर ली कि उसनें सरकारी फ़ौज की हथियारों की फ़ैक्ट्री को निशाना बनाया है। जबकि शहर के लोगों का कहना है कि यह फ़ैक्ट्रियां पिछले आठ महीनों से बंद पड़ी हैं। जहाँ मुल्क के अन्दर विरोधी लीडर इस घटना की निंदा कर इसे बेगुनाह लोगों का नरसंहार कह रहे हैं वहीं बाहर बैठे लीडर पूरी तरह ख़ामोश हैं जिससे पता चलता है कि असद सरकार के विरोधी गुट जिन्हें बाहर से गाइड लाईन दी जा रही है, ख़ून ख़राबा कर के मुल्क को बरबाद करने के अलावा और कोई मक़सद नहीं रखते।