16 फ़रवरी 2013 - 20:30

गुमराह, भ्रष्ट और सरकार से जुड़े कुछ सादा लोगों का बात चीत की हिमायत में एक क़तार में और इस्लामिक सिस्टम के विरोध में खड़ा हो जाना अमेरिकी साज़िश का पहला क़दम है

हालिया दिनों मुल्की और ग़ैर मुल्की मीडिया के साथ साथ डिप्लोमैटिक बैठकों तक में ईरान से सीधी बातचीत की अमेरिकन पेशकश पर चर्चा हो रही है। यह पेशकश राष्ट्रपति ओबामा, फ़र्स्ट सेक्रेट्री और नए फ़ारेन मिनिस्टर जान कैरी की ओर से की जा रही है। हालांकि पूर्वी मीडिया इस मुद्दे को ख़ूब उछाल रही है लेकिन सच्चाई यह है कि यह आफ़र नए फ़ारेन मिनिस्टर जान कैरी की देख रेख में ईरान के ख़िलाफ़ शुरू हुई डिप्लोमैसी के रूप में नई अमेरिकन साज़िश का पहला क़दम है जोकि निम्नलिखित विशेषताओं के साथ तैयार की गई और कई मक़सद रखती है:1. नई आर्थिक पाबंदियों के लागू होते ही ईरान से तेल ख़रीदने वाले मुल्क अधिक दबाव का शिकार हो रहे हैं और उन्हें तेल के बदले पैसे के बजाए दूसरी चीज़ें जैसे दवा आदि देना होगा। पाबंदियां और सख़्त कर के ओबामा सरकार यह बताना चाहती है कि हम यह सिलसिला आगे बढ़ाते ही जाएंगे और इसे रोकने का बातचीत के अलावा कोई चारा नहीं है।2. बार बार बात चीत की पेशकश कर के अमेरिका गेंद ईरान के पाले में डालना चाहता है कि ईरान या तो बात चीत के लिये तैयार हो जाए या फिर अपनी जनता और इन्टरनेशनल कम्युनिटी के सामने सफ़ाई देने पर मजबूर हो कि क्यों पाबंदियां स्वीकार करता जा रहा है?3. अगले राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेने को पर तौल रहे गुमराह और फ़सादी पार्टियों से जुड़े कुछ लोगों की ओर से बाहर की दुनिया को भेजे गए संदेश में ईरान इलेक्शन के हवाले से अमेरिका की बड़ी साज़िश का हिस्सा हैं। यह संदेश कुछ यूँ हैं:अ. अमेरिका से बातचीत कोई रेड लाईन नहीं है। इसलिये कि अमेरिका नें अपनी पॉलिसी बदली है इसलिये इस मुद्दे को केवल निगेटिव नहीं लेना चाहिये।ब. फ़ॉरेन पालिसी में कुछ बदलाव ला कर मुल्क की आर्थिक समस्याएं दूर की जा सकती हैं। स. अमेरिका से लेन देन ग़लत नहीं है इसलिये कि अब वह भी कुछ लो और कुछ दो की पालिसी अपना रहा है।गुमराह, भ्रष्ट और सरकार से जुड़े कुछ सादा लोगों का बात चीत की हिमायत में एक क़तार में और इस्लामिक सिस्टम के विरोध में खड़ा हो जाना अमेरिकी साज़िश का पहला क़दम है।4. इस समय बातचीत की पेशकश से इस्लामिक रिपब्लिक के कुछ ज़िम्मेदारों के आपसी विवाद खुलकर सामने आ जाएंगे। इसलिये कि सरकार से जुड़े लोग कई महीनों से इस विषय पर आपस में सलाह मशवरा कर रहे हैं और इस पर उनमें आपस में मतभेद भी हुआ है।5. अंदर से जाने वाले कुछ संदेशों से अमरीकियों को अंदाज़ा लगा कि कुछ लोग पश्चिम से सम्पर्क का बहुत शौक़ रखते हैं। इस समय बातचीत की इस अंदाज़ से पेशकश के नतीजे में इन लोगों में पश्चिम से नज़दीक होने की दौड़ शुरू हो जाएगी और आख़िर कार चुनाव के दौरान समझौते का पलड़ा विरोध पर भारी हो जाएगा।लेकिन सुप्रीम लीडर के अचानक और समय पर ऐक्शन नें, जोकि पश्चिमियों नें सोचा न होगा, अमरीका के सारे किये धरे पर पानी फेर दिया। आपके स्टैन्ड नें एक तीर से कई निशाने का काम किया:अ. चुनाव से पांच महीने पहले आप अपने पक्ष का दो टूक अंदाज़ में ख़ुलासा कर के अमेरिका से बात चीत के हवाले से ईरान की होम और फ़ारेन पालिसी को दिशा दिखा दी है ताकि किसी के पास कुछ भी कह देने का कोई बहाना न रहे।ब. बातचीत की पेशकश को रद्द कर के आपनें बाद के धोखों की पहले ही रोक थाम कर ली है जबकि अमेरिकियों की पालिसी यह थी कि वह 2013 में डिप्लोमैसी द्वारा ईरान को दबाएंगे और अपने फ़ायदे हासिल करेंगे। स. सुप्रीम लीडर नें इन्क़ेलाबी सिद्धांतों पर ज़ोर देकर ईरान और मध्य पूर्व के इन्क़ेलाबी माहौल जोड़ने और दोनों में ताल मेल बनाने की कोशिश की है।