ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने कल सुबह अपने फ़िक़्ह के दर्से ख़ारिज के दौरान ज़ोर देकर कहा कि ऐसे मौके जब इस्लामी इंक़ेलाब की कामयाबी को 34 साल बीत गए हैं ईरानी जनता, जवानों, बूढ़ों, मर्दों और औरतों की भारी भागीदारी इलाही नेमत है जिसका उम्र भर, शुक्रिया किया जाना चाहिए।
ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने मैदान में ईरानी जनता की हाज़िरी की सराहना करते हुए कहा कि बिल्कुल समय पर जब ईरानी राष्ट्र की संप्रभुता और इज़्ज़त व सम्मान के दुश्मनों को उम्मीद थी कि ईरानी जनता, इंक़ेलाब और इस्लामी रिपब्लिक की आवाज़ न सुनें, ईरानी क़ौम ने मैदान में उपस्थित होकर दुश्मनों को निराश कर दिया।
आपने इस बात की तरफ़ इशारा करते हुए कि इस्लामी इंक़ेलाब के दुश्मन, 22 बहमन के जुलूसों में ईरानी क़ौम की भागीदारी को कम दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं, कहा कि उसके बावजूद, वह वास्तविकता को समझते हैं और इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि ईरानी क़ौम का मुकाबला नहीं कर सकते।
कल 22 बहमन को ईरान भर में इस्लामी इंक़ेलाब की चौंतीसवीं सालगिरह के अवसर पर बड़ी बड़ी रैलिया निकाली गईं जिनमें जनता ने भरपूर हिस्सा लेकर इस्लामी इंक़ेलाब के संस्थापक हज़रत इमाम खुमैनी र.ह, सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई और इस्लामी हुकूमती सिस्टम से वफादारी का परिचय दिया और शहीदों और इस्लामी इंक़ेलाब के मकसद पर अग्रसर रहने पर बल दिया।