21 जनवरी 2013 - 20:30

बहरैन में जनक्रान्ति पर आले ख़लीफ़ा शासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को चुनौति देते हुए सोमवार की रात ऐसी स्थिति रैलियां निकलीं कि इस देश की सत्ता पर 230 वर्षों से अधिक समय से क़ब्ज़ा जमाए आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध आरंभ हुयी जनक्रान्ति की दूसरी वर्षगांठ का समय निकट आता जा रहा है...........

बहरैन में जनक्रान्ति पर आले ख़लीफ़ा शासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को चुनौति देते हुए सोमवार की रात ऐसी स्थिति रैलियां निकलीं कि इस देश की सत्ता पर 230 वर्षों से अधिक समय से क़ब्ज़ा जमाए आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध आरंभ हुयी जनक्रान्ति की दूसरी वर्षगांठ का समय निकट आता जा रहा है।ये रैलियां सोमवार को बहरैन के अनेक क़स्बों व गांवों में निकाली गयीं।इन रैलियों में बहरैनी जनता ने आले ख़लीफ़ा शासन से सत्ता से हटने की अपनी मांग दोहराई।राजधानी मनामा के 18 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित मलीकिया गांव में सउदी समर्थित बहरैनी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शन कर रही जनता को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले फ़ेंके और हवाई फ़ायरिंग की।ज्ञात रहे बहरैन में मध्य फ़रवरी 2011 से जनता ने, ट्यूनीशिया और मिस्र से प्रेरणा लेते हुए कि जहां जनक्रान्तियों ने तानाशाहों की सत्ता को उखाड़ फेंका, आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध प्रदर्शन शुरु किया है।शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर आले ख़लीफ़ा के सुरक्षा बलों की दमनात्मक कार्यवाही में दर्जनों लोग शहीद और सैकड़ों घायल हुए और बड़ी संख्या में राजनैतिक कार्यकर्ताओं को जेल में बंद कर दिया गया।हज़ारों लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण नौकरियों से निकाल दिया गया और बहुत से डाक्टरों और नर्सों को इसलिए जेल में डाल दिया गया क्योंकि उन्होंने बहरैनी पुलिस की बर्बरता में घायल होने वाले आम लोगों का उपचार किया था।बहरैनी जनता का कहना है कि वह जब तक प्रजातांत्रिक तरीक़े से चुनी गयी सरकार के गठन की उसकी मांग पूरी नहीं हो जाती उस समय तक आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध प्रदर्शन जारी रहेगा।बहरैन में अमरीका का पांचवां नौसैनिक बेड़ा है।.............166