17 जनवरी 2013 - 20:30

मरजा-ए-तक़लीद हज़रत आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी ने मसजिदे आज़म में अपने दर्से ख़ारिज के दौरान पाकिस्तान में कट्टरपंथी वहाबियों के हाथों शियों के नरसंहार और इस पर इंटर-नेशनल आर्गनाईज़ेशंस की ख़ामोशी की कड़ी आलोचना की......

क़ुमः मरजा-ए-तक़लीद हज़रत आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी ने मसजिदे आज़म में अपने दर्से ख़ारिज के दौरान पाकिस्तान में कट्टरपंथी वहाबियों के हाथों शियों के नरसंहार और इस पर इंटर-नेशनल आर्गनाईज़ेशंस की ख़ामोशी की कड़ी आलोचना की।उन्होंने इन अपराधों को दर्दनाक और भयंकर बताते हुए कहा कि हमने बहुत ज़्यादा ताकीद की है कि यह लोग मुग़लों से भी बदतर हैं, मुग़लों ने खुल्लम खुल्ला नरसंहार किया, लोगों के जाएदादें लूटीं, मगर यह लोग बेगुनाह मर्दों, औरतों, बच्चों, जवानों और बूढ़ों पर मस्जिदों में छुप छुप कर वार करते हैं।हज़रत आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कि क्यूँ दुनिया और इंटर-नेशनल आर्गनाईज़ेशंस इन अपराधों की निंदा नहीं करते हैं ताकीद कीः कोएटा में कुछ ग्रुप ऐसे हैं जो सऊदी अरब और अमेरिका से जुड़े हुए हैं और यह लोग भी इसी आधार पर उनकी निंदा नहीं करना चाहते हैं। हज़रत आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी ने ताकीद की कि मेरा इंटर-नेशनल आर्गनाईज़ेशंस से सवाल है कि क्यूँ इस तरह की आतंकी कार्यवाहियों के मुक़ाबले में ठोस क़दम नही उठाते है? कब तक इस तरह के अत्याचारों और अपराधों का सिलसिला जारी रहेगा? और बेगुनाहों के खून की होली खेली जाती रहेगी? क्युं इंटर-नेशनल आर्गनाईज़ेशंस और ह्युमन राइट्स घुटन में हैं और कोई आवाज़ नहीं उठा रही हैं?आप ने कहा अमेरिका और सऊदी अरब इन्हीं लोगो द्वारा सीरिया में आतंकी घटनाएं अंजाम दिलवा रहे हैं औऱ फिर आतंकियों खिलाफ लड़ाई लड़ने का दम भरते हैं, उन्हें शर्म नहीं आती कि उन्हीं के सपोर्ट और पैसों से तो दुनिया भर में आतंकी घटनाएं हो रही हैं और वह खुद आतंकवाद में सबसे आगे हैं।........166