6 जनवरी 2013 - 20:30

फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी: सी. आई. ए. और अमेरिकन डिफ़ेन्स मिनिस्ट्री (रक्षा मंत्रालय) के पास सैंकड़ों सरकारी फ़ाइलें ऐसी पोस्ट मार्टम रिपोर्टों से भरी पड़ी हैं जिनमें क़ैदियों के मरने का कारण टार्चर और जिस्म को लगने वाली चोटें बताया गया है.....

फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी: सी. आई. ए. और अमेरिकन डिफ़ेन्स मिनिस्ट्री (रक्षा मंत्रालय) के पास सैंकड़ों सरकारी फ़ाइलें ऐसी पोस्ट मार्टम रिपोर्टों से भरी पड़ी हैं जिनमें क़ैदियों के मरने का कारण टार्चर और जिस्म को लगने वाली चोटें बताया गया है।

फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार केटू रिसर्च सेंटर नें हाल ही में नाट हंटूफ़ का एक आर्टिकल छापा है जिसमें वह लिखते हैं: जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूँ कि 11 सितम्बर की घटना के बाद पकड़े गए लोगों को अमरीका विशेषकर सी. आई. ए. द्वारा टार्चर किये जाने के हवाले से सामने लाई गई 6 सौ पन्नों की रिपोर्ट के कुछ हिस्सों ही पर ज़बान खोलने में सीनेट की कमेटी को कई महीने लग जाएंगे। इस लिये कि उस रिपोर्ट को पहले राष्ट्रपति फिर कैबिनेट और सब से दिलचस्प यह कि ख़ुद सी. आई. ए. स्टडी करेगी।

सी. आई. ए. के डिप्टी चेयरमैन को अपने कर्मचारियों की हिम्मत और डिस्पलिन पर गर्व अमरीकन सीनेट की इंटेलीजेंस कमेटी के हेड सेनेटर डायान फ़िनेस्ट्रेन का कहना है कि यह ख़ुद सी. आई. ए. को स्टडी करना होगी कि इस रिपोर्ट में कितनी सच्चाई है (19 दिसम्बर के न्यूयार्क डेली में छपा आर्टिकल, हार्चर के अंधेरे में)। आप क्या सोच रहे हैं कि सी. आई. ए. यह काम कितनी ईमानदारी से करेगी? एजेंसी के डिप्टी चेयरमैन माईकल जी मोरल नें रिपोर्ट पर बोलते हुए कहा कि उन्हे अपने कर्मचारियों की हिम्मत और डिस्पिलिन पर बहुत गर्व है। साथ ही उन्होंनें इस बात पर सिनेटर डायान फ़िनिस्टेन की तारीफ़ की कि उन्होंनें रिपोर्ट को रिवीज़न के लिये खुला रखा है।

एफ़ भी. आई. टार्चर नहीं करतीइस बात नें मुझे वह ज़माना याद दिला दिया जब मैं यह कालम लिखा करता था कि अमेरिका टार्चर के हवाले से अपने और इंटर-नेशनल नियमों का पालन नहीं कर रहा है। एफ़. बी. आई. नें अपनी आंखों से सी. आई. ए. की दरिन्दगी और संदिग्ध लोगों पर टार्चर देख कर उसकी वाशिंगटन डी.सी. हेड क्वार्टर में शिकायत की थी। मैं ज़्यादातर एफ़. बी. आई. की इस बात पर निंदा करता था कि यह अपनी सीमाओं का ख़्याल नहीं रख रही है लेकिन एफ़. बी. आई. टार्चर नहीं करती।

ओबामा अमरीकी नागरिकों को बेख़बर रखने में माहिरहमें सीनेट की इन्टेलीजेंस कमेटी की तीस साला रिसर्च के अंजाम का इन्तेज़ार है। इससे पहले भी इस ख़ुफ़िया इशू की कुछ बातें लीक होती रही हैं। ओबामा जहाँ ख़ुफ़िया मालूमात राज़ में रखने की सख़्ती बरतते हैं वहीं जनता को बेख़बर रखने में भी एक्सपर्ट हैं। ओसामा को पकड़ने के लिये सी. आई. ए. की क़ैदियों पर सख़्तियां बेकार साबित हुईं। इस बारे में वाशिंगटन पोस्ट देंक में गर्गमेलर नें लिखा है कि सी. आई. ए. नें ओसामा का पता लगाने के लिये क़ैदियों पर हिंसा की लेकिन इसका न केवल यह कि कोई फ़ायदा नहीं हुआ बल्कि अलक़ाएदा से होने वाली बड़ी लड़ाईयों में उलटा नतीजा सामने आया। (रिपोर्टें बताती हैं सी. आई. ए. की सख़्तियां बेकार रहीं, गर्गमेलर वाशिंगटन पोस्ट, 13 दिसम्बर)

टार्चर का कोई असर नहीं हुआओडशो, प्रोग्राम में कॉलेन पावेल के ज़माने में फ़ॉरेन मिनिस्ट्री इम्प्लाइज़ यूनियन के हेड रह चुके करनल लारेन्स वेलक्रेसन यह कहते सुने जा सकते हैं कि सीनेट की रिपोर्ट का अगर यह हिस्सा हमें देखने की इजाज़त मिली तो उससे पता चल जाएगा कि इन्वेस्टीगेशन में सख़्ती बरतने का बिल्कुल कोई फ़ायदा नहीं हुआ है। (वेलक्रेसन: ख़ुफ़िया रिपोर्टें स्पष्ट करती हैं कि टार्चर का कोई असर नहीं हुआ है। एस्टयो फ़्रेंक, tv.msnbc.com, 13 दिसम्बर) कम से कम अमेरिकन्ज़ को यह तो बताया जाए कि उनके नाम पर क्या क्या हो रहा हैवेल्कर सून नें प्रोग्राम के होस्ट से कहा कि एफ़. बी. आई. का एजेण्ट रह चुका अली सूफ़ान और सी. आई. ए. के लिये काम कर चुका गेलेन कार्ल मेरे वह सोर्सेज़ हैं जिन्होंनें मुझे यह नतीजा लेने पर मजबूर किया है। आगे चलकर कहते हैं, लेकिन मैं इस मामले में उसका मुख़ालिफ़ हूँ। अगर हमें लोगों के सामने जवाबदे होना है तो कम से कम यह जनता को बताना होगा कि उनके नाम पर क्या क्या हो रहा है जोकि दर अस्ल वार क्राइम्ज़ हैं। अमरीकी अपराधियों को पानी में दम घुटने का एहसास दिलाने को टार्चर नहीं समझतेसबसे पहले, जैसा कि मैं कई बार इस बात को साबित करने के लिये इंटर-नेशनल समझौतों और अमेरिकन लॉ का हवाला देता रहा हूँ, कहना चाहिये कि यह सारी चीज़ें वार क्राइम्ज़ में आती हैं। जब क़ानून सबके लिये बराबर है तो यह चीज़ें वार क्राइम्ज़ क्यों नहीं कही जातीं और उसके करने वाले इसका जवाब क्यों नहीं देते? मैं जार्ज डब्ल्यू बुश को कभी भी बुरा नहीं कहता, बात बिल्कुल उल्टी है, लेकिन वो डिकचीनी और अपनी हुकूमत में शामिल दूसरे लोगों से ग़लत मशवरे लेते थे। मिसाल के तौर पर, अंधेरा पहलू, एक ऐसी रिपोर्ट है जिसमें डिकचीनी का दावा है कि वाटर बरडिंग, पानी में डूबने का एहसास दिलाना जिसमें अपराधी सख़्त घुटन महसूस करता है टार्चर शुमार नहीं होता। डिकचीनी साहब! अगर आप सही कह रहे हैं तो ख़ुद इसका मज़ा चख़ लीजिए।

11 सितम्बर के बाद अपराधियों को टार्चर किये जाने के सुबूतअगर आप इतना सब्र नहीं करना चाहते हैं कि देखें कि ओबामा और सी. आई. ए. सीनेट कमेटी को सेंट्रल इन्टेलीज