ईरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के अस्थाई इमाम ने कहा है कि दिसंबर वर्ष २००९ की घटना ईरानी राष्ट्र की होशियारी और इस्लामी व्यवस्था के शत्रुओं के मुक़ाबले में उसकी तत्परता की परिचायक है। श्री काज़िम सिद्दिक़ी ने तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के भाषण में कहा कि नौ दैय वर्ष १३८८ हिजरी शम्सी में ईरानी राष्ट्र ने इस देश की इस्लामी व्यवस्था के पश्चिमी शत्रुओं के षडयंत्रों को विफल करके देशीय और विदेशी शत्रुओं को बड़ी पराजय का कटु स्वाद चखा दिया। उन्होंने कहा कि २७ दिसंबर वर्ष २००९ को विदेशियों के कार्यक्रम और उनके समर्थन से ईरान में अशांति की आग जलाई गयी परंतु ईरानी राष्ट्र ने दूरदर्शिता और होशियारी से काम लेकर शत्रुओं के षडयंत्रों पर पानी फेर दिया। तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के अस्थाई इमाम ने कहा कि ईरानी जनता ने गत तीन दशकों के दौरान इस्लामी व्यवस्था के शत्रुओं के समस्त षडयंत्रों का पूरी बहादुरी से मुक़ाबला किया और अब भी वह अपने इसी मार्ग को जारी रखेगी। उन्होंने बल देकर कहा कि ईरान की इस्लामी व्यवस्था के शत्रुओं को जान लेना चाहिये कि जो लोग ईरान की इस्लामी व्यवस्था को आघात पहुंचाना चाहते हैं ईरानी जनता स्वर्गीय इमाम खुमैनी के मार्गदर्शनों से लाभ उठा कर उनके षडयंत्रों के मुक़ाबले में पूरी दृढ़ता के साथ डट जायेगी। तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के अस्थाई इमाम ने अपने खुत्बे में ग़ज़्जा की अत्याचारग्रस्त और लेबनानी जनता के समर्थन को ईरान की सिद्धांतिक नीति बताया और कहा कि इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैहि ने अतिक्रमणकारी ज़ायोनी शासन के मुक़ाबले में फिलिस्तीनी राष्ट्र के समर्थन पर विशेष ध्यान दिया था। ज्ञात रहे कि दिसंबर २००९ में कुछ उपद्रवी तत्वों ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का शोक मनाने वालों के जुलूसों पर आक्रमण करके अशांति उत्पन्न करने का प्रयास किया था जिसके विरोध में समूचे ईरान में प्रदर्शन हुए थे। .......... 166
27 दिसंबर 2012 - 20:30
समाचार कोड: 376420
ईरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के अस्थाई इमाम ने कहा है कि दिसंबर वर्ष २००९ की घटना ईरानी राष्ट्र की होशियारी और इस्लामी व्यवस्था के शत्रुओं के मुक़ाबले में उसकी तत्परता की परिचायक है.....