9 दिसंबर 2012 - 20:30

इस्लामी रिपब्लिक ईरान की राजधानी तेहरान में "मुसलमान यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर्ज़ और इस्लामी जागरूकता कॉन्फ़्रेंस की दो दिवसीय बैठक का आज सुबह आरंभ हुआ। इस कॉन्फ्रेंस में इस्लामी यूनिवर्सिटीज़ के 600 से अधिक प्रोफ़ेसर्ज़ शामिल हुए हैं..........

इस्लामी रिपब्लिक ईरान की राजधानी तेहरान में "मुसलमान यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर्ज़ और इस्लामी जागरूकता कॉन्फ़्रेंस की दो दिवसीय बैठक का आज सुबह आरंभ हुआ। इस कॉन्फ्रेंस में इस्लामी यूनिवर्सिटीज़ के 600 से अधिक प्रोफ़ेसर्ज़ शामिल हुए हैं।कॉन्फ़्रेंस के उद्घाटन सेशन को संबोधित करते हुए इंटरनेशनल असेम्बली फ़ॉर इस्लामी अवेकनिंग के जनरल सेक्रेटरी, मिस्टर अली अकबर विलायती ने कहा कि इस्लामी जागरूकता अपने रास्ते के अंतिम चरण में नहीं बल्कि आरम्भिक चरण में है और उसकी कामयाबियों को पूरा करने के लिए बेहद कोशिश की जरूरत है।उन्होंने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि आज इस्लामी जागरूकता की शुरुआत के तीन साल पूरे हो रहे हैं, कहा कि यह आंदोलन अब ऐसे दौर में प्रवेश कर गया है कि इस्लामी कलचर को पूरा करने के लिए इसे नया चरण कहा जा सकता है। अपनी स्पीच में डॉक्टर विलायती ने इस्लामी सरकार की आईडियालोजी पाने को इस्लामी क़ौम के लिए महत्वपूर्ण जरूरत बताते हुए कहा कि मुस्लिम क़ौम को ऐसी इस्लामी सरकार की जरूरत है जो विश्व स्तर पर शांति, इंसाफ और विकास का पालन करती हो। उन्होंने ईरान की इस्लामी सरकार से लड़ने के लिए इंटर-नेशनल साम्राज्य की साजिशों की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस्लाम फ़ोबिया और विचार अभिव्यक्ति के बहाने मुसलमानों के आस्थाओं का अपमान, इन्हीं साज़िशों की कड़ियां हैं।मिस्टर अली अकबर विलायती ने अपने संबोधन में गज़्जा में हमास की मौजूदा कामयाबी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लामी प्रतिरोध ने ज़ायोनी हुकूमत की कमजोरी को साबित कर दिया और ज़ायोनी हुकूमत को युद्ध विराम पर मजबूर कर दिया और ज़ायोनी हुकूमत की कमजोरी का प्रतीक है।........166