9 दिसंबर 2012 - 20:30

इस्राईल के पूर्व प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि बिन्यामिन नेतिनयाहू की यहूदी कालोनियों के निर्माण से संबंधित पालीसियों के कारण इस्राईल दुनिया में बिल्कुल अलग-थलग पड़ गया है...........

इस्राईल के पूर्व प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि बिन्यामिन नेतिनयाहू की यहूदी कालोनियों के निर्माण से संबंधित पालीसियों के कारण इस्राईल दुनिया में बिल्कुल अलग-थलग पड़ गया है। ओलमर्ट ने क़ुद्स के क़रीब कालोनियों में नई आवासीय इकाइयों के बनाने के इस्राईल के हालिया फ़ैसले की तरफ़ इशारा किया और कहाः इस स्कीम का इंटर-नेशनल सतह पर कड़ा विरोध हुआ है।पूर्व इस्राईली प्रधान मंत्री ओलमर्ट ने कहा कि ऐसे हालात में कि जब U.N में फ़िलिस्तीन के दर्जे में तरक़्क़ी के फ़िलिस्तीनियों की कोशिश के विरुद्ध अमरीका द्वारा इस्राईल के समर्थन को कुछ ही दिन बीते हैं, इस्राईल के इस फ़ैसले की घोषणा, उसके मुख्य घटक के मुंह पर तमाचा है।ओलमर्ट ने कहा कि इस्राईली पब्लिक को यह समझना चाहिए कि नेतिनयाहू दुनिया में इस्राईल के अलग-थलग पड़ने का कारण बने और हम इस सिलसिले में बड़ी क़ीमत चुकाने पर मजबूर हैं।ग़ौरतलब है U.N में फ़िलिस्तीन के ग़ैर सदस्यीय पर्यवेक्षक देश के रूप में तरक़्क़ी के बाद इस्राईल ने पश्चिमी तट पर तीन हज़ार नई आवासीय इकाइयों की कालूनियां बनाने का हुक्म जारी किया है।कई मुल्कों ने तेल अविव हुकूमत के इस फ़ैसले की निंदा की है और कम से कम आठ मुल्कों ने पिछले सप्ताह इस्राईल की इस स्कीम के विरुद्ध इस्राईली राजदूत को तलब किया। इस्राईल के राजदूत को तलब करने में उसके क़रीबी हिमायती देश जैसे जर्मनी, ब्रिटेन और इटली भी शामिल हैं।स्वीडेन के विदेश मंत्री ने इस्राईल की घोषणा को U.N में फ़िलिस्तीन के दर्जे में हुई तरक़्क़ी के विरुद्ध बदले की कार्यवाही बताया है।दूसरी ओर अमरीका ने इस्राईल पर ज़ोर दिया कि वह इस तरह के एकपक्षीय फ़ैसले पर दोबारा सोचे और संयम से काम ले क्योंकि इस तरह के क़दम के नकारात्मक नतीजे आते हैं और सीधी बातचीत शुरू करने की कोशिशों में कठिनाई पैदा होती है।...........166