13 नवंबर 2012 - 20:30

आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने मंगलवार की रात चौथी अतिमहत्वपूर्ण वैचारिक बैठक में लगभग 150 बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों, और विश्वविद्यालय के शिक्षकों के साथ भेंट में इस बात पर बल दिया कि स्वतंत्रता के विषय पर इस्लामी दृष्टिकोण को दृष्टिगत रखना चाहिए और कहा कि लिब्रल विचार में स्वतंत्रता का स्रोत मानववाद है जबकि इस्लाम में स्वतंत्रता का आधार एकेश्वरवाद और हर प्रकार की बुराइयों के प्रतीक का इंकार है............

इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठ नेता ने स्वतंत्रता के स्रोत व आधार को इस संबंध में इस्लाम और पश्चिम के दृष्टिकोण में अंतर का सबसे महत्वपूर्ण कारण बताया।आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने मंगलवार की रात चौथी अतिमहत्वपूर्ण वैचारिक बैठक में लगभग 150 बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों, और विश्वविद्यालय के शिक्षकों के साथ भेंट में इस बात पर बल दिया कि स्वतंत्रता के विषय पर इस्लामी दृष्टिकोण को दृष्टिगत रखना चाहिए और कहा कि लिब्रल विचार में स्वतंत्रता का स्रोत मानववाद है जबकि इस्लाम में स्वतंत्रता का आधार एकेश्वरवाद और हर प्रकार की बुराइयों के प्रतीक का इंकार है।आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने बल दिया कि इस्लाम की दृष्टि में मनुष्य ईश्वर की उपासना के सिवा हर बाध्यता से स्वतंत्र है।उन्होंने पश्चिमी समाज में स्वतंत्रता की वास्तविकता की ओर संकेत करते हुए कहाः पश्चिमी समाज में वास्तविकता बहुत कड़वी हैं और कुछ अवसरों पर घृणित हैं कि इनका परिणाम भेदभाव, धौंस-धमकी, युद्धोन्माद और मानवाधिकार व प्रजातंत्र जैसे उत्तम विषय के संबंध में दोमुखी व्यवहार के रूप में सामने हैं। वरिष्ठ नेता ने बल दिया कि इन खेदजनक वास्तविकताओं के बावजूद स्वतंत्रता के विषय पर शोध के लिए पश्चिमी विचारकों के दृष्टिकोणों का अध्ययन लाभदायक है क्योंकि उनके पास स्वतंत्रता संबंधित विचारों के संकलन का बहुत अनुभव है और इसी प्रकार इस विषय में उनके यहां विचारों में बहुत टकराव है