13 नवंबर 2012 - 20:30

सैयद हसन नस्रुल्लाह ने शहीद दिवस के अवसर जनता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा शहीदों का विशेष आदर व सम्मान होना चाहिए क्योंकि उन्होंने अपनी जान अल्लाह की राह में कुर्बान कर दी हैं...........

अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार सैयद हसन नस्रुल्लाह ने शहीद दिवस के अवसर जनता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा शहीदों का विशेष आदर व सम्मान होना चाहिए क्योंकि उन्होंने अपनी जान अल्लाह की राह में कुर्बान कर दी हैं।
उन्होंने कहा शहीद अहमद कसीर ने 11 नवंबर को ज़ायोनी शासन के लिए काले दिवस में बदला और ज़ायोनी शासन के खिलाफ सबसे पहली और महत्वपूर्ण  कार्रवाई का श्रेय अपने सिर लिया और परिणाम स्वरूप शहीद हुए और इसी हिसाब से 11 नवंबर को  शहीद दिवस का नाम दिया गया और इसी प्रक्रिया ने वर्ष 2000 और वर्ष 2006 में इस्लामी प्रतिरोध की सफलता के लिए माहौल प्रदान किया।
लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन के महासचिव ने सभी अवैध अधिकृत भूमियों की स्वतंत्रता तक ज़ायोनी शासन के विरुद्ध संघर्ष जारी रखने पर बल दिया है।लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन के महासचिव सैयद हसन नस्रुल्लाह ने सोमवार की शाम दक्षिणी बैरूत के ज़ाहिया क्षेत्र में शहीद दिवस के अवसर पर अपने भाषण में कहा कि अतिग्रहणकारी ज़ायोनियों के क़ब्ज़े से सभी अतिग्रहित भूमियों की स्वतंत्रता तक संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने लेबनान में इस्लामी प्रतिरोध के तीस वर्षों से जारी संघर्ष की उपलब्धियों की ओर संकेत करते हुए कहा वर्ष १९८२ में शहीद अहमद क़सीर ने जो शहादत प्रेमी आक्रमण किया था वह ज़ायोनी शासन के विरुद्ध अरबों के संघर्ष के इतिहास का सब से बड़ा आक्रमण था। लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन के महासचिव ने लेबनान में इस्लामी प्रतिरोध को ख़त्म करने हेतु इस्राईल व अमरीका  प्रयासों की ओर संकेत करते हुए कहा कि अमरीका और इस्राईल  तथा चौदह मार्च आंदोलन ने लेबनान में प्रतिरोध की शक्तियों को ख़त्म करने का भरसक प्रयास किया किंतु उन्हें विफलता मिली।
सैयद हसन नस्रुल्लाह ने इसी प्रकार अवैध अधिकृत भूमियों में हिज़्बुल्लाह के ड्रोन विमान की उड़ान को प्रतिरोध मोर्चे की शक्ति का चिन्ह बताया और कहा कि ज़ायोनी शासन ने भी इस ड्रोन विमान के आधुनिक होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने सीरिया के मामलों पर बोलते हुए कहा कि अरब संघ ने स्वंय को रात दिन सीरिया की परिस्थितियों में व्यस्त कर रखा है जबकि अरब संघ और इस्लामी संगठनों को मियामांर में मुसलमानों के विरुद्ध होने वाली कार्यवाहियों पर ठोस रुख अपनाना चाहिए।
लेबनान का हिज़्बुल्लाह आंदोलन ११ नवम्बर को शहीद दिवस के रूप में मनाता है। ११ नवम्बर वर्ष १९८२ में लेबनानी स्वतंत्रता सेनानी अहमद क़सीर ने इस्राईल के विरुद्ध पहला और सब से अधिक महत्वपूर्ण आत्मघाती आक्रमण किया था जिसमें १५१ से अधिक ज़ायोनी मारे गये थे।

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